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UP Electricity Demand:बारिश ने बदला यूपी की बिजली का गणित, 24 घंटे में 125.1 मिलियन यूनिट खपत घटी; 6197 MW कम हुई पीक डिमांड

उत्तर प्रदेश में सितंबर के आखिरी दिनों में हुई बारिश का असर बिजली की मांग पर साफ दिखाई दिया। UPSLDC के आंकड़ों के मुताबिक 24 से 25 सितंबर के बीच राज्य की बिजली खपत 125.1 मिलियन यूनिट कम हुई, जबकि अधिकतम मांग में 6,197 मेगावाट की गिरावट दर्ज की गई। बारिश और उमस में कमी ने बिजली की मांग को कैसे प्रभावित किया, जानिए पूरी कहानी।

बारिश से क्यों कम हुई बिजली की मांग?

सितंबर के दूसरे हिस्से में बारिश कमजोर पड़ने के बाद कई इलाकों में उमस बढ़ी थी। ऐसे मौसम में पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर जैसे कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने से बिजली की मांग भी ऊपर गई।बारिश तेज होने के बाद तापमान और उमस में कमी आई। इसके परिणामस्वरूप घरेलू कूलिंग उपकरणों के इस्तेमाल में कमी आई और इसका असर कुल बिजली खपत पर पड़ा। यही वजह है कि 25 सितंबर को खपत और पीक डिमांड दोनों में तेज गिरावट दिखाई दी।

23 सितंबर को करीब 29 हजार मेगावॉट तक पहुंची थी मांग

बिजली की मांग में यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके ठीक पहले मांग काफी ऊंचे स्तर पर थी। रिपोर्ट के अनुसार 23 सितंबर की रात प्रदेश की बिजली मांग करीब 29 हजार मेगावाट तक पहुंच गई थी। इसके बाद 24 सितंबर को अधिकतम मांग 27,577 MW दर्ज की गई। बारिश सक्रिय होने के बाद अगले ही दिन यह मांग घटकर 21,380 MW रह गई।

मौसम का भी बिजली मांग पर पड़ा सीधा असर

26 सितंबर को उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति बनी रही। विभिन्न IMD-आधारित रिपोर्टों के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी और 27 सितंबर को भी बारिश की संभावना थी। इसी बारिश के कारण कई जिलों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ और कुछ जिलों में स्कूल बंद करने के आदेश भी दिए गए। हालांकि बिजली की मांग आगे किस स्तर पर रहेगी, यह बारिश के बाद तापमान और उमस में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा। मौसम साफ होने और गर्मी/उमस बढ़ने पर कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल दोबारा बढ़ सकता है, जिससे बिजली की मांग भी ऊपर जा सकती है।

27 सितंबर तक बारिश, फिर बदल सकता है बिजली का गणित

मौसम के मोर्चे पर भी अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण हैं। IMD के 26 सितंबर के आधिकारिक चेतावनी अपडेट के अनुसार 27 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना बताई गई थी। 28 सितंबर से दोनों क्षेत्रों के लिए कोई चेतावनी नहीं दी गई है। इसका मतलब है कि अगर बारिश के कारण तापमान और उमस नीचे बनी रहती है तो बिजली की मांग कुछ समय और अपेक्षाकृत कम रह सकती है। वहीं मौसम साफ होने और तापमान बढ़ने पर घरेलू कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल दोबारा बढ़ सकता है। ऐसे में बिजली की मांग फिर ऊपर जाने की संभावना रहेगी।

बारिश से बिजली प्रबंधन को मिली राहत

बारिश के कारण बिजली की मांग कम होने से पावर सिस्टम पर दबाव भी घटा है। यह राहत ऐसे समय मिली है जब सितंबर में प्रदेश बिजली उपलब्धता और कोयले की कमी से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा था। इससे पहले Hindustan Times ने बताया था कि कोयला आपूर्ति प्रभावित होने के कारण यूपी को सामान्य से कम बिजली उपलब्ध हो रही थी और बिजली खरीद की जरूरत भी बढ़ी थी। कुछ रिपोर्टों के अनुसा25 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक लगातार बारिश से तापमान गिरने के कारण बिजली की मांग कम हुई और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे आपूर्ति किए जाने की बात सामने आई।

फिलहाल बारिश ने उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को मांग के मोर्चे पर बड़ी राहत दी है। 24 सितंबर की 501.3 मिलियन यूनिट खपत 25 सितंबर को 376.2 मिलियन यूनिट रह गई, जबकि पीक डिमांड 27,577 MW से घटकर 21,380 MW हो गई। हालांकि इसे स्थायी गिरावट नहीं माना जा सकता। मौसम साफ होने और तापमान बढ़ने पर बिजली की मांग फिर तेजी पकड़ सकती है।

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