उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने आठ उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इनमें प्रयागराज से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता और इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के दो बार अध्यक्ष रह चुके राधाकांत ओझा का नाम भी शामिल है। करीब 38 वर्षों की वकालत और बार की राजनीति में सक्रिय भूमिका के बाद ओझा अब संसद के उच्च सदन की चुनावी दौड़ में हैं।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार, 5 अक्टूबर को राज्य की 10 राज्यसभा सीटों के लिए अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए। इस सूची में प्रयागराज से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा का नाम सबसे चर्चित चेहरों में है। ओझा लंबे समय तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत करने के साथ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। भाजपा की ओर से उनका नाम सामने आने के बाद प्रयागराज के राजनीतिक और विधिक गलियारों में चर्चा बढ़ गई है।
कौन हैं राधाकांत ओझा?
राधाकांत ओझा मूल रूप से प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र से जुड़े हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पहचान रखते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने वर्ष 1988 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से वकालत की शुरुआत की थी। यानी उनके पास करीब 38 वर्षों का कानूनी अनुभव है।वकालत के साथ-साथ ओझा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव और संगठनात्मक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। यही अनुभव अब उन्हें राज्यसभा की राजनीति तक ले आया है।
दो बार रह चुके हैं हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष
राधाकांत ओझा का सबसे महत्वपूर्ण परिचय इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में रहा है। वह 2015 और 2021 में दो बार अध्यक्ष चुने गए। वर्ष 2015 में उन्होंने अध्यक्ष पद का चुनाव 1,012 मतों के अंतर से जीता था।
दिसंबर 2021 में भी उन्होंने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने मतदान किया था और ओझा ने दोबारा बार की कमान संभाली। बार एसोसिएशन के नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश के विधिक समुदाय में मजबूत पहचान दिलाई। अब भाजपा ने इसी पृष्ठभूमि वाले चेहरे को राज्यसभा चुनाव में उतारकर एक अलग तरह का राजनीतिक संदेश दिया है।
केशरीनाथ त्रिपाठी से भी रहा जुड़ाव
राधाकांत ओझा का वरिष्ठ भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी से भी लंबे समय तक जुड़ाव बताया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार यह संबंध छात्र जीवन से शुरू हुआ था और बाद में हाईकोर्ट में वकालत के दौरान भी बना रहा।ओझा का परिवार भी राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके बड़े भाई शिवाकांत ओझा प्रतापगढ़ की रानीगंज विधानसभा सीट से विधायक रहे और समाजवादी पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इससे राधाकांत ओझा के राजनीतिक और सामाजिक संपर्कों का दायरा भी काफी व्यापक माना जाता है।
BJP ने यूपी से आठ उम्मीदवार उतारे
भाजपा ने यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए आठ नाम घोषित किए हैं। इनमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। पार्टी की सूची में दो महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। वहीं कई मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। राजनीतिक विश्लेषणों में इसे यूपी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की संगठनात्मक और सामाजिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनावउत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। भाजपा के आठ उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद अब चुनावी समीकरण और स्पष्ट हो गए हैं। पार्टी के उम्मीदवारों का नामांकन प्रक्रिया भी इसी चुनाव कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ रही है। भाजपा की सूची में राधाकांत ओझा का नाम इसलिए भी खास है क्योंकि वह पारंपरिक राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले नेता के बजाय विधिक क्षेत्र से सीधे राज्यसभा की राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी विधिक और प्रबुद्ध वर्ग में अपनी पहुंच को भी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
वकालत से संसद तक कितना लंबा होगा सफर?
राधाकांत ओझा के लिए यह चुनाव उनके करीब चार दशक लंबे सार्वजनिक जीवन का नया पड़ाव है। हाईकोर्ट में वकालत, बार एसोसिएशन का नेतृत्व और अब राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में मैदान उनके राजनीतिक सफर में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।अब उनकी नजर 16 अक्टूबर के राज्यसभा चुनाव पर है। अगर चुनावी गणित उनके पक्ष में रहा तो इलाहाबाद हाईकोर्ट की बार राजनीति से निकला यह चेहरा संसद के उच्च सदन में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करता नजर आएगा। इस लिहाज से राधाकांत ओझा की उम्मीदवारी न सिर्फ प्रयागराज बल्कि प्रदेश के विधिक समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।













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