Prayagraj News: प्रयागराज में हो रहे सड़क बदलाव कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए करीब 8,316 करोड़ रुपये की दो बड़ी NHAI परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है। इनमें लेप्रोसी चौराहा से मिर्जापुर बाईपास तक NH-35 के 80.791 किलोमीटर हिस्से को 2 लेन से 4 लेन करना और चित्रकूट-राजापुर-प्रयागराज के बीच 49.655 किमी का नया 4 लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनाना शामिल है। यह सब बदलाव प्रयागराज में किए जा रहे है।
प्रयागराज में सड़क दो लेन से होगा चार लेन
प्रयागराज के लेप्रोसी चौराहा से, प्रयागराज से मिर्जापुर बाईपास तक NH-35 के 80.791 किलोमीटर हिस्से को 2 लेन से 4 लेन करने की योजना है। इस पर करीब 4,495.43 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे प्रयागराज मिर्जापुर की सफर डेढ़ घंटे में पूरी होगी। परियोजना में जरूरत के मुताबिक सड़क का री-अलाइनमेंट और बाईपास भी शामिल हैं। इससे प्रयागराज और मिर्जापुर के बीच वाहनों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। सड़क की क्षमता बढ़ने से यात्री वाहनों के साथ मालवाहक वाहनों को भी फायदा मिलेगा।
चित्रकूट से प्रयागराज तक बनेगा नया रास्ता
प्रयागराज के सड़क बदलाव में दूसरी बड़ी परियोजना चित्रकूट से राजापुर होते हुए प्रयागराज तक 49.655 किलोमीटर लंबा 4 लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर है। इस पर 3,820.96 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह नया मार्ग आबादी वाले इलाकों और मौजूदा जाम वाले रास्तों से अलग एक वैकल्पिक कनेक्शन देगा। इससे चित्रकूट धाम, राजापुर और प्रयागराज के बीच सफर आसान होने के साथ पर्यटन और कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
प्रयागराज में माघ-कुंभ के दौरान भी मिलेगा फायदा
बैठक में प्रयागराज में होने वाले माघ मेला और कुंभ के दौरान भारी वाहनों के दबाव को कम करने पर भी चर्चा हुई। NHAI अधिकारियों ने बताया कि रिंग रोड के जरिए वैकल्पिक कनेक्टिविटी विकसित करने पर काम चल रहा है, जिससे जरूरत पड़ने पर मिर्जापुर की तरफ से आने वाले वाहनों को शहर के बाहर से निकाला जा सकेगा।
दक्षिण प्रयागराज को जोड़ने पर भी जोर
मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम ने परियोजनाओं को दक्षिण प्रयागराज से बेहतर तरीके से जोड़ने की जरूरत बताई। PDA के उपाध्यक्ष ऋषि राज ने हाईवे कनेक्टिविटी को प्रस्तावित एयरोसिटी, नैनी के औद्योगिक क्षेत्र, प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर और लेप्रोसी चौराहे से जोड़ने का सुझाव दिया। अधिकारियों के मुताबिक दोनों परियोजनाओं के अलाइनमेंट से जुड़े फैसले मंत्रालय स्तर पर लिए जा चुके हैं। अब अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय के जरिए आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जा रही है।











