नई दिल्ली: भारत में 12-13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS Summit की मेजबानी करने जा रहा है। इस बार भारत की अध्यक्षता का फोकस आर्थिक सहयोग, तकनीक, व्यापार, डिजिटल पेमेंट, ऊर्जा, स्वास्थ्य और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर है। सालभर में 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें भी हो चुकी हैं।
12-13 सितंबर को दिल्ली में होगा बड़ा सम्मेलन
भारत इस बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। इसमें BRICS सदस्य देशों के नेताओं के साथ पार्टनर देशों और आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इससे पहले 11 सितंबर को BRICS Business Forum भी होगा, जिसमें कारोबार और निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
इस बार BRICS की थीम क्या है?
BRICS में भारत ने 2026 की अध्यक्षता के लिए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” थीम रखी है। आसान भाषा में इसका मतलब है मुश्किल परिस्थितियों से निपटने की क्षमता बढ़ाना, नई तकनीक और इनोवेशन को बढ़ावा देना, देशों के बीच सहयोग मजबूत करना और विकास को पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ बनाना। भारत ने इसके साथ “Humanity First” यानी मानवता को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण पर भी जोर दिया है।
11 सदस्य देश, 10 पार्टनर देश
शुरुआत में BRICS में केवल 5 देश ही थे जो कि ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका थे। पर अब BRICS में पहले के मुकाबले काफी बड़ा हो चुका है। फिलहाल इसमें 11 पूर्ण सदस्य देश हैं जो कि ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात। इसके अलावा 10 पार्टनर देश भी हैं जो कि बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम। यानी BRICS का दायरा अब सिर्फ पांच पुराने देशों तक सीमित नहीं रह गया है।
350 से ज्यादा बैठकें, 25 से अधिक शहर
दिल्ली में होने वाला Summit सिर्फ दो दिनों का कार्यक्रम है, लेकिन भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान पूरे साल काफी गतिविधियां हुई हैं। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और हाई लेवल बातचीत आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के साथ आर्थिक-फाइनेंशियल सहयोग और सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने पर काम किया गया।
व्यापार और निवेश पर भी रहेगा जोर
भारत चाहता है कि BRICS केवल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित न रहे, बल्कि इसका फायदा कारोबार और आम अर्थव्यवस्था को भी मिले। इसलिए व्यापार, निवेश, वित्तीय सहयोग, सप्लाई चेन, ऊर्जा और छोटे कारोबारों के लिए फंडिंग जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे। भारत डिजिटल टेक्नोलॉजी और भुगतान व्यवस्था के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है। Reuters के मुताबिक भारत BRICS देशों के बीच Central Bank Digital Currencies यानी CBDC को जोड़ने और सीमा पार भुगतान को आसान बनाने की दिशा में भी प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है।
UPI और डिजिटल पेमेंट पर भारत की नजर
भारत अपने UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुभव को BRICS देशों के साथ साझा करने पर भी जोर दे रहा है। मकसद यह है कि अलग-अलग देशों के बीच भुगतान और कारोबार की प्रक्रिया ज्यादा आसान और तेज हो सके। अगर इस दिशा में ठोस सहमति बनती है तो अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भारतीय डिजिटल पेमेंट मॉडल की भूमिका और बढ़ सकती है।
2026 में BRICS के 20 साल भी पूरे
इस साल BRICS के लिए एक और वजह से खास है। 2026 में BRICS की स्थापना के 20 साल पूरे हो रहे हैं। भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी BRICS की अध्यक्षता कर चुका है। 2026 की अध्यक्षता भारत की चौथी BRICS Chairship है।











