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UNESCO की लिस्ट में भारत के 3 नए स्थल! अंडमान के ज्वालामुखी से सिरपुर तक, दुनिया में बढ़ेगी भारत की धरोहरों की पहचान

बाराटांग के मड वोल्केनो, अंडमान के ज्वालामुखीय द्वीप और छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक सिरपुर भारत की UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हुए। इन स्थलों को भविष्य में विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम है।

भारत के 3 और धरोहर स्थल UNESCO की सूची में शामिल, अब टेंटेटिव लिस्ट में 81 साइटें

नई दिल्ली: भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह तथा छत्तीसगढ़ के तीन स्थलों को UNESCO की विश्व धरोहर टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है। इसके साथ ही भारत की इस सूची में शामिल स्थलों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इन तीनों स्थलों के प्रस्ताव 28 सितंबर 2026 को सूची में दर्ज किए गए थे।

इस सूची में शामिल होने वाले स्थलों में बाराटांग का कार्स्ट-मड-वोल्केनो कॉम्प्लेक्स, अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी और छत्तीसगढ़ का सिरपुर सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य शामिल हैं।

इन स्थलों की खासियत यह है कि ये भारत की विरासत के तीन अलग-अलग पहलुओं को सामने लाते हैं। बाराटांग अपने अनोखे भूवैज्ञानिक स्वरूप के लिए जाना जाता है, अंडमान के ज्वालामुखीय द्वीप पृथ्वी की आंतरिक गतिविधियों और जैव विविधता के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं, जबकि सिरपुर प्राचीन भारत की स्थापत्य कला, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक विकास की कहानी बताता है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होने का मतलब किसी स्थल को विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलना नहीं है। इसके लिए आगे औपचारिक नामांकन और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

1. बाराटांग: अनोखे मड वोल्केनो और चूना-पत्थर की गुफाओं की दुनिया

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में स्थित बाराटांग अपने विशिष्ट भूवैज्ञानिक स्वरूप के लिए जाना जाता है। यहां चूना-पत्थर की गुफाएं और मड वोल्केनो यानी मिट्टी के ज्वालामुखी पाए जाते हैं।

सामान्य ज्वालामुखियों से अलग, मड वोल्केनो से पिघला हुआ लावा नहीं निकलता। इनके माध्यम से जमीन के भीतर से मिट्टी, पानी और गैसों का मिश्रण सतह पर आ सकता है।

बाराटांग का भूवैज्ञानिक महत्व इसे पृथ्वी की संरचना और प्राकृतिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनाता है। यहां की चट्टानी संरचनाएं और गुफाएं लंबे समय में विकसित हुई प्राकृतिक प्रक्रियाओं की जानकारी देती हैं।

UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में इसका शामिल होना भारत की उन प्राकृतिक धरोहरों की ओर ध्यान आकर्षित करता है, जिन्हें आमतौर पर देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों जितनी पहचान नहीं मिलती।

हालांकि, इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।

2. अंडमान के ज्वालामुखीय द्वीप: बैरन और नारकोंडम क्यों हैं खास?

दूसरी प्रस्तावित धरोहर का नाम अंडमान सबडक्शन वोल्केनोज है। इसमें बैरन द्वीप और नारकोंडम द्वीप शामिल हैं।

बैरन द्वीप भारत के एकमात्र पुष्ट सक्रिय ज्वालामुखी का घर है। यह द्वीप भूवैज्ञानिक गतिविधियों और ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिहाज से विशेष महत्व रखता है।

दूसरी ओर, नारकोंडम द्वीप अपनी ज्वालामुखीय संरचना, वनस्पति और विशिष्ट जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यह नारकोंडम हॉर्नबिल नामक पक्षी का प्रमुख प्राकृतिक आवास है, जो इसी द्वीप तक सीमित प्रजाति है।

इन दोनों द्वीपों का महत्व केवल उनकी भौगोलिक बनावट तक सीमित नहीं है। ये पृथ्वी की टेक्टोनिक गतिविधियों, ज्वालामुखियों के विकास और अलग-थलग द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र को समझने के अवसर भी प्रदान करते हैं।

UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में इनका शामिल होना भारत की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, इन संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी पर्यटन गतिविधि को पर्यावरणीय सीमाओं और संरक्षण संबंधी नियमों के अनुरूप ही संचालित करना होगा।

3. छत्तीसगढ़ का सिरपुर: प्राचीन भारत की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र

तीसरा स्थल छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महानदी के पूर्वी तट पर स्थित सिरपुर का सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य है।

प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से धार्मिक गतिविधियों, व्यापार, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

सिरपुर में हिंदू मंदिरों, बौद्ध विहारों और अन्य पुरातात्विक संरचनाओं के अवशेष मिले हैं। ये प्रमाण बताते हैं कि इस क्षेत्र का विकास विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संपर्क के साथ हुआ।

यहां स्थित लक्ष्मण मंदिर अपनी प्राचीन ईंटों से निर्मित स्थापत्य शैली के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसके अलावा, बौद्ध विहारों और अन्य ऐतिहासिक संरचनाओं के अवशेष इस क्षेत्र के प्राचीन सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक जीवन की जानकारी देते हैं।

UNESCO के आधिकारिक विवरण के अनुसार, सिरपुर की प्रमुख संरचनाएं व्यापक रूप से पांचवीं से बारहवीं शताब्दी ईस्वी के बीच की हैं। यह क्षेत्र प्राचीन नगर नियोजन, स्थापत्य कला और विभिन्न धार्मिक परंपराओं के सह-अस्तित्व को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

सिरपुर को टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किए जाने से छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को व्यापक पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे भविष्य में पुरातात्विक शोध, संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को प्रोत्साहन मिल सकता है।

UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट क्या होती है?

UNESCO की विश्व धरोहर टेंटेटिव लिस्ट उन स्थलों की सूची होती है, जिन्हें संबंधित देश भविष्य में विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए संभावित उम्मीदवार मानता है।

किसी स्थल को सामान्यतः औपचारिक नामांकन के लिए आगे बढ़ने से पहले देश की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल करना जरूरी होता है। इसके बाद नामांकन संबंधी दस्तावेज तैयार किए जाते हैं और निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी की जाती है।

अंतिम निर्णय के बाद ही किसी स्थल को UNESCO की आधिकारिक विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जा सकता है।

इसलिए बाराटांग, अंडमान सबडक्शन वोल्केनोज और सिरपुर के मामले में फिलहाल सही स्थिति यह है कि ये स्थल भारत की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हुए हैं। इन्हें अभी UNESCO की अंतिम विश्व धरोहर मान्यता प्राप्त होने का दावा करना सही नहीं होगा।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?

इन तीन स्थलों का चयन भारत की विरासत की विविधता को सामने लाता है।

जहां बाराटांग भूवैज्ञानिक संरचनाओं और प्राकृतिक गुफाओं के महत्व को उजागर करता है, वहीं अंडमान के ज्वालामुखीय द्वीप पृथ्वी की आंतरिक प्रक्रियाओं और जैव विविधता के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं। सिरपुर भारत की प्राचीन स्थापत्य कला, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक नगर विकास का प्रतिनिधित्व करता है।

इन स्थलों को भविष्य में विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है या नहीं, यह आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिर भी, टेंटेटिव लिस्ट में इनकी मौजूदगी इनके संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर है।

इससे स्थानीय पर्यटन, शोध और विरासत संबंधी जागरूकता को बढ़ावा मिलने की संभावना है। हालांकि, ऐसे लाभ अपने आप सुनिश्चित नहीं होते। इनके लिए प्रभावी संरक्षण, बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन नीतियों की आवश्यकता होगी।

आगे क्या होगा?

अगले चरण में इन स्थलों के लिए औपचारिक नामांकन, उनके महत्व से संबंधित दस्तावेज और संरक्षण एवं प्रबंधन की योजनाएं महत्वपूर्ण होंगी।

संबंधित अधिकारियों को यह प्रदर्शित करना होगा कि ये स्थल विश्व धरोहर के निर्धारित मानदंडों पर किस प्रकार खरे उतरते हैं और भविष्य में उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

फिलहाल भारत की UNESCO टेंटेटिव लिस्ट में 81 स्थल शामिल हैं, जबकि आधिकारिक विश्व धरोहर सूची में भारत के 45 स्थल दर्ज हैं। ये दोनों अलग-अलग सूचियां हैं और इनके आंकड़ों को एक-दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

बाराटांग के मिट्टी के ज्वालामुखियों से लेकर अंडमान के सक्रिय ज्वालामुखीय परिदृश्य और सिरपुर के प्राचीन मंदिरों तक, ये तीनों स्थल भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के अलग-अलग आयाम प्रस्तुत करते हैं।

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