प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुरू हुई ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ के समापन के सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 अक्टूबर को वाराणसी आ रहे हैं। इसी दौरे में वे राजातालाब तहसील के शहंशाहपुर गांव में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) के स्थायी परिसर की आधारशिला भी रख सकते हैं। 50 एकड़ में फैलने वाला यह कैंपस करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से तीन साल में बनकर तैयार होगा और यह उत्तर प्रदेश का दूसरा NFSU कैंपस होगा।
वाराणसी। काशी में फॉरेंसिक जांच और अपराध विज्ञान की पढ़ाई को नई दिशा मिलने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 अक्टूबर को वाराणसी आ रहे हैं। यह दौरा मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में निकली ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ के काशी में समापन और विश्वनाथ धाम में जलाभिषेक से जुड़ा है।
इसी यात्रा के दौरान गृह मंत्री नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) के नए और स्थायी परिसर की आधारशिला भी रख सकते हैं। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में इसे लगभग तय बताया गया है, जबकि अन्य सूत्रों के अनुसार यह अभी संभावित कार्यक्रम है। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां इसी अनुमान के आधार पर चल रही हैं, और इससे पूर्वांचल समेत पूरे उत्तर भारत में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की कमी दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
कहां और कब बनेगा कैंपस-
यह नया परिसर वाराणसी की राजातालाब तहसील के शहंशाहपुर गांव में लगभग 50 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। यह जमीन पहले पशुपालन विभाग के अधीन थी, जिसका भूमि स्थानांतरण अब पूरा हो चुका है। निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है, और प्रशासन 7 अक्टूबर को गृह मंत्री अमित शाह के हाथों इसके औपचारिक शिलान्यास की तैयारियां कर रहा है।
कितनी लागत और कितने समय में तैयार होगा भवन
परियोजना पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और भवन को पूरी तरह आकार लेने में करीब तीन साल का समय लगेगा। निर्माण पूरा होने के बाद यह उत्तर प्रदेश का दूसरा NFSU कैंपस होगा, जिससे राज्य में फॉरेंसिक शिक्षा के बुनियादी ढांचे को और मजबूती मिलेगी।
क्यों जरूरी है यह कैंपस –
दुनिया में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भारी कमी को देखते हुए यह विश्वविद्यालय एक अहम कदम माना जा रहा है। नए आपराधिक कानूनों के तहत गंभीर अपराधों (7 साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों) में फॉरेंसिक अधिकारी का घटनास्थल पर जाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे प्रशिक्षित फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ी है। पूर्वांचल और बिहार के युवाओं को इससे सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
अभी कैसे चल रही है पढ़ाई
स्थायी भवन तैयार होने से पहले ही NFSU की पढ़ाई अगस्त महीने से शुरू हो चुकी है। फिलहाल इसे अस्थायी रूप से जाल्हूपुर स्थित समेकित विद्यालय भवन में संचालित किया जा रहा है। यहां पांच वर्षीय बीएससी-एमएससी और दो वर्षीय एमएससी कोर्स में 30-30 सीटों पर पहले बैच की कक्षाएं चल रही हैं।
कैंपस में मिलेंगी ये सुविधाएं
नया परिसर पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिसमें शामिल हैं-
- उच्च स्तरीय विधि विज्ञान और साइबर सुरक्षा प्रयोगशाला
- एंडिजिटल फॉरेंसिक और व्यवहार विज्ञान से जुड़ी रिसर्च लैब
- स्मार्ट क्लासरूम और सेमिनार हॉल समृद्ध डिजिटल पुस्तकालय छात्रों के लिए आवासीय सुविधा
- व्यावहारिक प्रशिक्षण हेतु अत्याधुनिक तकनीकी उपकरण
- भवन तैयार होने के बाद यहां फॉरेंसिक साइंस, साइबर इन्वेस्टिगेशन और क्रिमिनोलॉजी जैसे विशिष्ट पाठ्यक्रम संचालित होंगे, और अतिरिक्त कोर्स शुरू होने पर छात्रों की संख्या 500 से अधिक हो जाने का अनुमान है।
तैयारियों की निगरानी में जुटा प्रशासन
विश्वविद्यालय प्रशासन के समन्वय से स्थानीय अधिकारी शिलान्यास कार्यक्रम की तैयारियों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर भूमि पूजन, निर्माण कार्यों और उच्च शिक्षा व फॉरेंसिक जांच सुविधाओं के विस्तार से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।











1 thought on “वाराणसी में बनेगा UP का दूसरा फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी कैंपस, जानें अमित शाह के 7 अक्टूबर दौरे की पूरी डिटेल”