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आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत दो दिन बढ़ी, ममता बनर्जी ने उठाए सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाई जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की पूर्व प्रधानमंत्री ममता बनर्जी ने दोनों नेताओं की हिरासत पर सवाल उठाते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। इसके बाद CJP ने सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी का आभार जताया। यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ उठाए गए सवालों से जुड़ा है।

ममता बनर्जी ने सरकार पर साधा निशाना

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर पोस्ट कर अशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत बढ़ाए जाने की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को विरोध करने के कारण निशाना बनाया जा रहा है और ऐसी कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। उन्होंने सरकार से दोनों नेताओं को तत्काल रिहा करने की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया।

CJP ने ममता बनर्जी के सहयोग के लिए उनका धन्यवाद किया

ममता बनर्जी के समर्थन के बाद CJP की आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से उनका आभार जताया गया। पार्टी ने लिखा, “मैम आपके सहयोग के लिए थैंक्यू।” CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी अपने साथियों की गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि दोनों नेताओं की रिहाई की प्रकिया में अनावश्यक देरी की जा रही है। CJP ने हिरासत बढ़ने के फैसले को चुनौती देने की बात भी कही है। हालांकि, पार्टी के आरोपी और प्रशासन के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है

अदालत ने क्यों बढ़ाई न्यायिक हिरासत

19 अक्टूबर 2026 को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत 2 दिन और बढ़ाने का आदेश दिया। अदालत ने अपने आदेश में पहले दिए गए बॉन्ड की कथित शर्तों के उल्लंघन और शांति भंग होने की आशंका का उल्लेख दिया। दिल्ली पुलिस ने भी उनकी रिहाई से कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई थी। वहीं, CJP की कानून टीम ने हिरासत बढ़ाने के फैसले पर आपत्ति जताई और इसे उच्च अदालत में चुनौती देने की बात कही मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर के लिए निर्धारित बताई गई है।

SIR और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर फिर बहस

इस घटनाक्रम ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण, राजनीतिक विरोध और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है एक तरफ CJP और उसके समर्थक कार्रवाई का विरोध की आवाज दबाने वाला कदम बता रहे हैं, वहीं पुलिस ने अपनी कार्रवाई के समर्थन मे कानून व्यवस्था से जुड़ी आशंकाएं रखी है। अब सबकी नजर मामले की अगले सुनवाई और दोनों नेताओं की रिहाई से जुड़े फैसले पर है। फिलहाल ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया और CJP के धन्यवाद संदेश ने इस मामले को राजनीतिक रूप से चर्चा में ला दिया है।

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