SIR और मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल का 2013 का संसदीय भाषण साझा किया। सिब्बल ने उस समय मतदाता सूची से नाम हटाने की तीन परिस्थितियां बताई थीं। रिजिजू ने इसी पुराने बयान के आधार पर कांग्रेस के मौजूदा ‘वोट चोरी’ अभियान पर सवाल उठाए।
नई दिल्ली: मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक तकरार के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल का करीब 13 साल पुराना संसदीय भाषण साझा किया है। रिजिजू ने इस वीडियो को कांग्रेस के मौजूदा ‘वोट चोरी’ अभियान के संदर्भ में इस्तेमाल करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा।
रिजिजू ने 6 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि सिब्बल का पुराना संसदीय बयान कांग्रेस के मौजूदा आरोपों पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, ‘वोट चोरी’ का आरोप राजनीतिक विवाद का हिस्सा है और इसे किसी निष्कर्ष के रूप में नहीं, बल्कि विपक्ष के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।
2013 में कपिल सिब्बल ने संसद में क्या कहा था?
राज्यसभा की आधिकारिक कार्यवाही के रिकॉर्ड के मुताबिक, 23 अगस्त 2013 को तत्कालीन कानून मंत्री कपिल सिब्बल से मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल पूछा गया था।
जवाब में सिब्बल ने कहा था कि मतदाता सूची से नाम हटने के तीन प्रमुख मामले हो सकते हैं:
- मतदाता एक विधानसभा क्षेत्र से दूसरे विधानसभा क्षेत्र में चला जाए।
- मतदाता का नाम एक से अधिक जगह दर्ज हो।
- मतदाता की मृत्यु हो जाए।
उन्होंने यह भी कहा था कि जिन लोगों का नाम गलत तरीके से हट गया है, वे चुनाव अधिकारी के पास जाकर अपना नाम फिर से दर्ज कराने की प्रक्रिया अपना सकते हैं। यह विवरण राज्यसभा के आधिकारिक डिबेट रिकॉर्ड में उपलब्ध है।
रिजिजू ने वीडियो शेयर कर कांग्रेस पर क्यों साधा निशाना?
रिजिजू ने सिब्बल के पुराने बयान को मौजूदा मतदाता सूची विवाद से जोड़ते हुए कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ अभियान पर सवाल उठाया।उन्होंने दावा किया कि सिब्बल ने कानून मंत्री रहते संसद में स्वयं मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया समझाई थी। रिजिजू ने इसी आधार पर कांग्रेस के मौजूदा राजनीतिक अभियान को निशाना बनाया।
रिजिजू ने इस विवाद में पूर्व कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली के पुराने संसदीय बयान का भी उल्लेख किया और कांग्रेस की EVM संबंधी स्थिति पर सवाल उठाए।
SIR को लेकर क्या है मौजूदा विवाद?
Election Commission के आधिकारिक Citizen Service Portal पर SIR-2026 के लिए मतदाताओं को अपना नाम खोजने, नोटिस का जवाब देने और मतदाता पंजीकरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। आयोग के पोर्टल पर Form 6 नए मतदाता के पंजीकरण और Form 7 मतदाता सूची से नाम हटाने/आपत्ति दर्ज करने के लिए उपलब्ध है। Form 8 का इस्तेमाल मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड में सुधार, स्थानांतरण और EPIC से संबंधित बदलावों के लिए किया जा सकता है। यही SIR प्रक्रिया अब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
6 अक्टूबर को दिल्ली में क्या हुआ?
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026, को INDIA bloc के सांसदों और विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। उनकी प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR को लेकर सवाल शामिल थे।Indian Express के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से पहले रोका गया और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विपक्ष ने संशोधित मतदाता सूचियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है।
बुधवार को दिल्ली पुलिस द्वारा राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य समर्थकों के खिलाफ आकाशवाणी भवन परिसर में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश को लेकर FIR दर्ज किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई।
विपक्ष का क्या कहना है?
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और SIR की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर INDIA bloc के सांसदों ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी ने भी प्रदर्शन के दौरान निर्वाचन आयोग से विपक्षी सांसदों से मिलने की मांग की थी।
BJP का जवाब क्या है?
BJP और उसके नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अभियान बताया है। किरेन रिजिजू ने प्रदर्शन को ‘ड्रामा’ करार देते हुए कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग और दूसरी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। रिजिजू का कपिल सिब्बल का पुराना भाषण शेयर करना भी इसी राजनीतिक जवाब का हिस्सा है।












