एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली छत्तीसगढ़ की स्टार खिलाड़ी संजू देवी जब एयरपोर्ट पहुंचीं, तो उनका स्वागत करने के लिए न कैमरे थे और न ही समर्थकों की भीड़। इंटरनेट पर इस वीडियो के आने के बाद अन्य खेलों के खिलाड़ियों के साथ होने वाले भेदभाव पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
नई दिल्ली:अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर भारत का परचम लहराने वाले खिलाड़ियों की वापसी पर अक्सर ढोल-नगाड़ों की थाप, गगनभेदी नारे और मीडिया के कैमरों का हुजूम देखने को मिलता है। लेकिन जब एशियाई खेलों (Asian Games 2026) में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लौटीं अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी एयरपोर्ट पहुंचीं, तो वहां का नज़ारा देखकर हर कोई हैरान रह गया।इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एक भावुक करने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें एशियन गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट संजू देवी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बिल्कुल अकेली खड़ी नजर आ रही हैं। उनके पास न तो स्वागत करने वाली कोई भीड़ थी, न कोई अधिकारी और न ही कोई मीडिया का बड़ा अमला।
एयरपोर्ट पर पसरा सन्नाटा और सादगी
वायरल हो रही वीडियो क्लिप में देखा जा सकता है कि भारत की राष्ट्रीय जर्सी पहने संजू देवी खुद अपनी ट्रॉली खींच रही हैं। ट्रॉली पर उनका बैग रखा हुआ है, जिस पर कुछ फूलों की मालाएं चढ़ी हुई हैं। उनके गले में भारत की जीत की चमक बिखेरता स्वर्ण पदक दिखाई दे रहा है। इतनी बड़ी ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के बावजूद उनकी सादगी और शांत स्वभाव ने हर किसी का दिल छू लिया, लेकिन साथ ही इस स्थिति ने देश के खेल प्रशासन पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
फैंस का फूटा गुस्सा: ‘क्या केवल क्रिकेट ही देश का खेल है?’
इस वीडियो के सोशल मीडिया पर आते ही खेल प्रेमियों का गुस्सा भड़क उठा। हजारों यूजर्स ने इस वीडियो को शेयर करते हुए भारतीय खेल जगत में मौजूद दोहरे रवैये की कड़ी आलोचना की। लोगों का कहना है कि अगर कोई क्रिकेटर एक छोटी सीरीज भी जीतकर लौटता है तो एयरपोर्ट पर भारी सुरक्षा और प्रशंसकों का तांता लग जाता है, लेकिन देश के लिए पसीना बहाकर ‘गोल्ड’ लाने वाली बेटियों के साथ ऐसा बर्ताव बेहद दुखद है। कई लोगों ने खेल मंत्रालय और स्थानीय खेल संघों से पूछा कि इतने बड़े चैंपियन की अगवानी के लिए कोई आधिकारिक इंतजाम क्यों नहीं किया गया था?
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गांव की गलियों से एशियन गेम्स का स्वर्णिम सफर
छत्तीसगढ़ के कोरबा के छोटे से गांव की संजू देवी ने गरीबी और सीमित संसाधनों के कड़े थपेड़ों के बावजूद कभी हार नहीं मानी। भूख, अभाव और आंसुओं को अपनी ताकत बनाकर उन्होंने जी-तोड़ मेहनत की और राष्ट्रीय कबड्डी टीम में अपनी जगह पक्की की।एशियन गेम्स में ईरान के खिलाफ बेहद रोमांचक और सांसें थमा देने वाले फाइनल मुकाबले में संजू ने अपनी जांबाज परफॉर्मेंस से भारत की ऐतिहासिक जीत की नींव रखी और अपने अटूट हौसले के दम पर देश को ‘गोल्ड मेडल’ दिलाकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
सरकार ने दी सम्मान राशि, मगर व्यवस्था पर उठे सवाल
संजू देवी की इस उपलब्धि के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें मुख्यमंत्री निवास पर आमंत्रित कर सम्मानित किया था और 51 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की थी। इसके बावजूद, हवाई अड्डे से आई इस अकेली तस्वीर ने यह साबित कर दिया है कि भले ही सरकारें बाद में पुरस्कारों की बौछार कर दें, लेकिन मैदान से लौटते समय खिलाड़ियों को जो मान-सम्मान तुरंत मिलना चाहिए, उसमें आज भी हमारा सिस्टम काफी पीछे है।










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