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यूपी चुनाव 2027: अखिलेश यादव की अधिकारियों को चेतावनी, शिक्षामित्रों को स्थायी नौकरी देने का वादा

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 21 अक्टूबर को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आगामी विधान परिषद चुनावों में शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश ने निर्वाचन आयोग से चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने और किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने की अपील की।

अधिकारियों को निष्पक्ष रहने की चेतावनी

अखिलेश यादव ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) और जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी फोन के जरिए शिक्षकों और मतदाताओं को डराने या प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों के अनुसार काम करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता की तरह। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ चुनावी अनियमितताओं के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

शिक्षामित्रों को स्थायी नौकरी देने का वादा

शिक्षामित्रों के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने बड़ा राजनीतिक वादा किया। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो शिक्षामित्रों को पूर्ण शिक्षक का दर्जा और सरकारी सेवा से जुड़े लाभ दिलाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था के लिए अलग बजट बनाया जा सकता है, ताकि पहले से कार्यरत शिक्षकों की नौकरियों पर कोई असर न पड़े। यह सपा का चुनावी वादा है, लागू हो चुकी सरकारी योजना नहीं।

2027 के चुनाव से पहले सियासी रणनीति तेज

उत्तरप्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बन रहे हैं। अखिलेश यादव ने शिक्षामित्रों के साथ-साथ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों तथा सम्मान का मुद्दा भी उठाया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब 23 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव निर्धारित हैं। इन चुनावों और राजनीतिक बयानों का 2027 के विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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