झलवा परिसर में आयोजित समारोह में 22 मेधावियों को मिले पदक, दिव्यांश ओमर बने चेयरमैन स्वर्ण पदक विजेता, विशेषज्ञों ने छात्रों को AI के फायदे-नुकसान पर किया आगाह
प्रयागराज। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), इलाहाबाद के झलवा परिसर स्थित मुख्य सभागार में शनिवार दोपहर 2:30 बजे संस्थान का 21वां दीक्षांत समारोह भव्य तरीके से आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों छात्रों को उनकी मेहनत का प्रतिफल डिग्री के रूप में मिला।
किसे मिली कितनी डिग्री
IIIT दीक्षांत समारोह में कुल 728 छात्रों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 466 स्नातक, 210 स्नातकोत्तर, 13 एमटेक-पीएचडी दोहरी उपाधि, एक एमबीए-पीएचडी, सात कार्यरत पेशेवरों के लिए पीएचडी और 31 शोधार्थी शामिल रहे। स्नातक स्तर पर 281 विद्यार्थियों को बीटेक सूचना प्रौद्योगिकी, 140 को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी और 45 को बिजनेस इंफॉर्मेटिक्स की उपाधि मिली।
मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी
समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), कोलकाता के अध्यक्ष प्रो. अरविंद ए. नाटू रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रो. भीम सिंह और आईआईआईटी इलाहाबाद के पूर्व छात्र व Disseqt AI के संस्थापक-सीईओ अपूर्व कुमार मौजूद रहे। संस्थान के निदेशक प्रो. मुकुल शरद सुतावने ने संस्थागत उपलब्धियों की जानकारी साझा की।
22 मेधावियों को मिले पदक, दिव्यांश ओमर बने चेयरमैन
मेधावी प्रदर्शन करने वाले 22 छात्रों को विभिन्न श्रेणियों में पदक देकर सम्मानित किया गया। छात्र दिव्यांश ओमर को उनके समग्र शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित चेयरमैन स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
विशेषज्ञों ने संदेश दिया कि ज्ञान का उपयोग समाज के लिए करें
विशिष्ट अतिथि प्रो. भीम सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं, बल्कि उसका उपयोग आम लोगों की समस्याओं के समाधान में भी होना चाहिए। वहीं पूर्व छात्र अपूर्व कुमार ने छात्रों से आग्रह किया कि वे सिर्फ बड़े पैकेज या पद को सफलता का पैमाना न मानें, बल्कि निरंतर सीखने, जिम्मेदारी और ईमानदारी से काम करने की आदत डालें।
मुख्य अतिथि प्रो. नाटू ने छात्रों को भविष्य की चुनौतियों- ऊर्जा सुरक्षा, सौर ऊर्जा, हाइड्रोजन ईंधन, स्वच्छ जल और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और IoT जैसी तकनीकें इन समस्याओं के समाधान में सहायक हो सकती हैं, लेकिन साथ ही AI के दुरुपयोग से नौकरी, निजता, रचनात्मकता और मानवीय रिश्तों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को लेकर भी सतर्क किया।
नया पाठ्यक्रम ढांचा और रिकॉर्ड प्लेसमेंट
निदेशक प्रो. सुतावने ने बताया कि संस्थान के नए बीटेक पाठ्यक्रम में 160 क्रेडिट के साथ अनिवार्य बहुविषयक माइनर शुरू किया गया है, जिसके तहत छात्र उद्यमिता-नवाचार, अर्थशास्त्र-वित्त, भारतीय ज्ञान परंपरा और ललित कला जैसे क्षेत्रों में से अपनी रुचि अनुसार माइनर चुन सकेंगे। इसके अलावा संस्थान ने सभी 11 एमटेक कार्यक्रमों के नाम और पाठ्यक्रम को भी नई तकनीकी जरूरतों के अनुरूप अपडेट किया है।प्लेसमेंट के मोर्चे पर भी संस्थान का प्रदर्शन शानदार रहा। वर्ष 2026 के बीटेक बैच में पंजीकृत 480 विद्यार्थियों में से 462 का चयन हुआ, जिससे प्लेसमेंट दर 96.25 प्रतिशत दर्ज की गई। चयनित छात्रों का औसत वार्षिक पैकेज करीब 32.50 लाख रुपये, जबकि माध्यिका पैकेज 26 लाख रुपये रहा।
पिछले वर्ष से बेहतर रहा प्रदर्शन, पहली बार शामिल हुए इतने पीएचडी स्कॉलर्स
संस्थान के इतिहास में यह पहला मौका रहा जब दीक्षांत समारोह में 52 पीएचडी स्कॉलर्स को उपाधियां प्रदान की गईं, जो पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक संख्या है। बीते वर्ष 2025 में हुए 20वें दीक्षांत समारोह में कुल 648 डिग्रियां बांटी गई थीं, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 728 पहुंच गया। यानी संस्थान से डिग्री पाने वाले छात्रों की संख्या में करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि संस्थान के बढ़ते शोध कार्यों और शैक्षणिक विस्तार को भी दर्शाती है।











