प्रयागराज: धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए पहचाने जाने वाले प्रयागराज में हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। बमरौली स्थित प्रयागराज एयरपोर्ट के रनवे के विस्तार की खबर सामने आई है। दैनिक जागरण और अमर उजाला की 12 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, रनवे को मौजूदा 2,700 मीटर से बढ़ाकर 3,300 मीटर करने की योजना है। यानी इसकी लंबाई में करीब 600 मीटर की बढ़ोतरी की जाएगी। इस परियोजना को भविष्य में बढ़ने वाली हवाई यातायात की जरूरतों और वर्ष 2031 में प्रस्तावित कुंभ मेले की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
रनवे विस्तार से क्या होगा फायदा?
रनवे किसी भी एयरपोर्ट की प्रमुख आधारभूत संरचनाओं में शामिल होता है। इसकी लंबाई और सतह की स्थिति विमानों के सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बड़े और भारी विमानों को संचालित करने के लिए केवल लंबा रनवे ही पर्याप्त नहीं होता। विमान का वजन, मौसम, तापमान, ऊंचाई, रनवे की मजबूती और अन्य तकनीकी मानक भी अहम होते हैं।
यदि प्रस्तावित विस्तार पूरा होता है और जरूरी तकनीकी मंजूरियां मिलती हैं, तो प्रयागराज एयरपोर्ट की भविष्य की परिचालन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे बड़े विमानों के संचालन की संभावनाओं का आकलन करना आसान होगा। हालांकि, रनवे की लंबाई बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि सभी बड़े विमानों को तुरंत यहां उतरने की अनुमति मिल जाएगी।
2031 कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए तैयारी
प्रयागराज में कुंभ और महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक, अधिकारी और अन्य यात्री पहुंचते हैं। ऐसे अवसरों पर सड़क और रेल के साथ हवाई सेवाओं पर भी दबाव बढ़ सकता है। वर्ष 2031 में होने वाले कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट की सुविधाओं का विस्तार भविष्य की जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बेहतर हवाई संपर्क से दूसरे शहरों से प्रयागराज पहुंचने वाले यात्रियों को सुविधा मिल सकती है। इससे धार्मिक पर्यटन, स्थानीय कारोबार और क्षेत्रीय आवागमन को भी लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि रनवे विस्तार के साथ टर्मिनल, पार्किंग, एप्रन, टैक्सी-वे और विमानन सेवाओं से जुड़ी दूसरी व्यवस्थाओं को किस तरह विकसित किया जाता है।
रनवे विस्तार से जुड़ा आधिकारिक दस्तावेज क्या कहता है?
रनवे से जुड़े कार्यों के संबंध में रक्षा मंत्रालय के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर भी एक आधिकारिक निविदा दर्ज है। इसमें बमरौली एयर स्टेशन, प्रयागराज में रनवे के विस्तार, री-सर्फेसिंग और संबंधित कार्यों का उल्लेख किया गया है। यह दस्तावेज परियोजना से जुड़े कार्यों की पुष्टि करता है, लेकिन इससे अपने आप रनवे की अंतिम लंबाई या किसी विशेष बड़े विमान के संचालन की मंजूरी प्रमाणित नहीं होती।
बोइंग-777 और एयरबस A350 के संचालन पर क्या स्थिति है
रनवे विस्तार की खबरों में बोइंग-777 और एयरबस A350 जैसे बड़े विमानों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की वेबसाइट पर प्रयागराज एयरपोर्ट की उपलब्ध जानकारी में Airbus A321 को क्रिटिकल एयरक्राफ्ट बताया गया है। इसलिए बड़े विमानों के संचालन को फिलहाल संभावित क्षमता के रूप में देखना चाहिए, न कि शुरू हो चुकी सेवा के रूप में।
वास्तविक संचालन के लिए रनवे की लंबाई के साथ उसकी भार-वहन क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था, टैक्सी-वे, पार्किंग की सुविधा और विमानन नियामकों की मंजूरी जैसे पहलुओं का आकलन जरूरी होगा। संबंधित एजेंसियों की ओर से अंतिम तकनीकी विवरण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन विमानों का संचालन संभव होगा।
क्षेत्रीय विकास को मिल सकती है गति
प्रयागराज एयरपोर्ट का विस्तार शहर की बढ़ती जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बेहतर हवाई सुविधाएं यात्रियों को अधिक विकल्प दे सकती हैं और धार्मिक पर्यटन के साथ व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। खासकर कुंभ जैसे बड़े आयोजन में समय पर और सुगम आवागमन की व्यवस्था प्रशासन के लिए अहम रहती है।फिलहाल, रनवे को 600 मीटर बढ़ाकर 3,300 मीटर करने की जानकारी प्रमुख मीडिया रिपोर्टों में प्रकाशित हुई है। परियोजना की प्रगति, निर्माण पूरा होने की समयसीमा और बड़े विमानों के संचालन की आधिकारिक मंजूरी से संबंधित आगे के अपडेट पर नजर रहेगी।













2 thoughts on “प्रयागराज एयरपोर्ट का रनवे होगा लंबा, बड़े विमानों की लैंडिंग का रास्ता होगा आसान; 2031 कुंभ पर नजर”