ट्रेनों में ब्रेक बाइंडिंग के कारण पहियों के गर्म होने, चिंगारी और धुएं जैसी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने की दिशा में निर्देश जारी किए हैं। चेन पुलिंग या स्टेशन पर रुकने के बाद ट्रेन को तुरंत रवाना करने के बजाय ब्रेक सिस्टम को पूरी तरह रिलीज होने की पुष्टि पर जोर दिया गया है। रेलवे के प्रशिक्षण और सुरक्षा दस्तावेजों में भी ब्रेक बाइंडिंग, ACP और आग/हॉट एक्सल जैसी स्थितियों की पहचान और कार्रवाई को महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रक्रिया माना गया है।
प्रयागराज। ट्रेनों में कभी-कभी पहियों के जाम होने यानी ब्रेक बाइंडिंग की वजह से ब्रेक ब्लॉक और पहियों के बीच अत्यधिक घर्षण पैदा हो सकता है। इससे गर्मी बढ़ने के साथ धुआं या चिंगारी जैसी स्थिति बन सकती है। इसी तरह अलार्म चेन खींचने के बाद यदि ब्रेक सिस्टम पूरी तरह सामान्य हुए बिना ट्रेन को आगे बढ़ा दिया जाए तो जोखिम बढ़ सकता है।
इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे की ओर से लोको पायलट और रखरखाव से जुड़े कर्मचारियों को ब्रेक सिस्टम की स्थिति पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने RDSO की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर इस दिशा में देशव्यापी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
चेन पुलिंग के बाद तुरंत नहीं दौड़ेगी ट्रेन
अब ACP यानी Alarm Chain Pulling या स्टेशन पर रुकने के बाद ट्रेन को सिग्नल मिलते ही जल्दबाजी में रवाना करने के बजाय ब्रेक के पूरी तरह रिलीज होने का इंतजार करना महत्वपूर्ण होगा।इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ट्रेन के सभी कोचों में ब्रेक सामान्य स्थिति में आ चुके हों। रेलवे के प्रशिक्षण मॉड्यूल में भी ACP, ब्रेक बाइंडिंग और ब्रेक रिलीजिंग को ट्रेन संचालन की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में शामिल किया गया है।
ब्रेक बाइंडिंग दिखे तो ट्रेन रोककर होगी जांच
नई व्यवस्था का अहम हिस्सा यह है कि अगर चलते समय लोको पायलट को ट्रेन के संचालन में असामान्यता दिखाई देती है—जैसे लोड/ट्रैक्टिव एफर्ट में असामान्य बदलाव, इंजन पर ज्यादा जोर या गति में अचानक कमी तो इसे संभावित ब्रेक बाइंडिंग का संकेत मानकर ट्रेन की जांच की जा सकती है।
ऐसी स्थिति में ट्रेन को आगे खींचते रहने के बजाय समस्या की पहचान करना जरूरी है। इसका मकसद पहिए और ब्रेक के बीच अत्यधिक घर्षण से पैदा होने वाली गर्मी को बढ़ने से रोकना है। ताजा रिपोर्ट में भी इसी प्रक्रिया को धुआं और आग की घटनाओं को रोकने से जोड़ा गया है।
इंजन के एयर ड्रायर पर भी रहेगा विशेष ध्यान
निर्देशों में लोकोमोटिव के एयर ड्रायर को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। एयर ब्रेक सिस्टम में नमी से संबंधित समस्या को रोकने के लिए इसे चालू और कार्यशील रखना जरूरी माना गया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इंजन बदलते समय संबंधित वाल्व से दबाव पूरी तरह निकालने की प्रक्रिया पर भी जोर दिया गया है। रेलवे के आधिकारिक प्रशिक्षण दस्तावेजों में भी एयर ड्रायर की जानकारी, लोको ब्रेक सिस्टम की जांच और विभिन्न pneumatic failures से निपटने की ट्रेनिंग शामिल है।
LHB कोचों की ब्रेक जांच भी अहम
रेलवे के मुताबिक LHB कोचों के ब्रेक प्रेशर की मानक जांच और रखरखाव प्रक्रिया यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। रेलवे के प्रशिक्षण मॉड्यूल में भी brake power, continuity test, brake binding और brake release जैसी प्रक्रियाओं को ट्रेन संचालन का हिस्सा बनाया गया है।
रेलवे पहले से भी बढ़ा रहा है फायर सेफ्टी
यह कदम रेलवे की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। रेलवे मंत्रालय ने अगस्त 2026 में बताया था कि कोचों में आग से निपटने के लिए फायर सेफ्टी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। प्रत्येक कोच में कम से कम दो फायर एक्सटिंग्विशर और पैंट्री कारों में वाटर-मिस्ट फायर एक्सटिंग्विशर जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है। मई 2026 में त्रिवेंद्रम-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में आग की घटना के बाद रेलवे ने देशभर में कोचों और ड्राइव से जुड़े फायर सिस्टम का ऑडिट भी शुरू किया था।












