महाराष्ट्र में टैक्सी, ऑटो और ऐप-आधारित कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किए जाने के बाद राज्य में सियासी बहस तेज हो गई है। RTO ने 20 अगस्त से चालकों की जांच शुरू कर दी है। अब तक बड़ी संख्या में चालकों को नोटिस दिए जा चुके हैं। इसी मुद्दे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
20 अगस्त से शुरू हुई जांच
महाराष्ट्र सरकार ने यात्री परिवहन से जुड़े व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किया है। इसमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब चालक शामिल हैं। नियम के तहत चालकों को यात्रियों से रोजमर्रा की बातचीत मराठी में करने लायक भाषा ज्ञान होना चाहिए।20 अगस्त से राज्य के RTO कार्यालयों ने इसकी जांच शुरू की। चालकों से 16 सवालों के जरिए उनकी मराठी समझ और बातचीत की क्षमता परखी जा रही है। नए ऑटो और टैक्सी बैज के लिए होने वाली भाषा जांच को वीडियो रिकॉर्ड करने की व्यवस्था भी की गई है।
777 चालकों को नोटिस
महाराष्ट्र परिवहन विभाग के अनुसार, 22 अगस्त को 5,211 चालकों की जांच की गई। इनमें 777 चालकों को मराठी का अपेक्षित व्यावहारिक ज्ञान नहीं होने पर नोटिस दिया गया। इनमें से 722 चालक मुंबई महानगर क्षेत्र के बताए गए हैं। नोटिस पाने वाले चालकों को मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय दिया गया है।इससे पहले 16 अगस्त तक करीब 25 हजार ऑटो चालकों का मराठी प्रशिक्षण या प्रमाणन पूरा नहीं हुआ था। इनमें 7,750 चालक परीक्षा में असफल हुए थे, जबकि 17,427 चालक प्रशिक्षण पूरा नहीं कर पाए थे।
नियम नहीं मानने पर क्या होगा?
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक, जिन चालकों को भाषा की आवश्यकता पूरी नहीं करने पर नोटिस दिया जाता है, उन्हें पहले सुधार का मौका दिया जाएगा। एक महीने के बाद भी नियम का पालन नहीं होने पर ड्राइविंग बैज को निलंबित किया जा सकता है। लगातार नियमों का उल्लंघन करने पर बैज और परमिट रद्द करने तक की कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी की रोजी-रोटी छीनना नहीं है। उसका तर्क है कि महाराष्ट्र में यात्रियों को सेवा देने वाले चालकों को स्थानीय भाषा में सामान्य बातचीत करने में सक्षम होना चाहिए।
अखिलेश यादव ने जताई आपत्ति
अब इस फैसले पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं। 23 अगस्त को उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए महाराष्ट्र सरकार की नीति की आलोचना की।अखिलेश यादव ने कहा कि हर राज्य की मातृभाषा का सम्मान और प्रचार होना चाहिए, लेकिन किसी भाषा को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरे राज्य में रोजगार के लिए जाने वाले लोगों पर भाषा की ऐसी अनिवार्यता लगाना देश में कहीं भी काम करने के उनके अधिकार को प्रभावित तो नहीं करता।उन्होंने यह भी सवाल किया कि अगर दूसरे राज्यों से आने वाले कामगारों के लिए ऐसी शर्त रखी जा रही है, तो मुंबई में काम करने वाली विदेशी कंपनियों पर भी क्या इसी तरह की शर्त लागू होगी। अखिलेश ने आरोप लगाया कि ऐसी नीतियों का असर गरीब और कमजोर वर्गों पर ज्यादा पड़ सकता है।
सरकार का तर्क बनाम विरोध के सवाल
महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि स्थानीय भाषा का बुनियादी ज्ञान यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बेहतर संवाद के लिए जरूरी है। दूसरी तरफ, आलोचकों का सवाल है कि मुंबई जैसे देश के सबसे बड़े महानगरों में अलग-अलग राज्यों से आकर काम करने वाले लोगों के लिए भाषा की अनिवार्यता रोजगार के अवसरों को प्रभावित कर सकती है।इस विवाद के बीच एक बात स्पष्ट है कि फिलहाल सरकार ने नियम लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और RTO स्तर पर चालकों की जांच जारी है। वहीं, राजनीतिक दलों के बीच इसे लेकर बहस भी तेज होती जा रही है।







