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4 महीने पहले की बनी गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश का ‘रियलिटी चेक’, कहीं गड्ढा तो कहीं दो फीट पानी

उन्नाव: 29 अगस्त 2026 को उद्घाटन हुए गंगा एक्सप्रेसवे में लगातार बारिश के बाद पर हालात बिगड़ गए। 4 महीने पहले बनी हुई यह एक्सप्रेसवे जो कि मेरठ से प्रयागराज तक को जोड़ती है उसका बारिश में पानी भर जाने के कारण लोगो को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे के बशीरतगंज टोल प्लाजा और आसपास के हिस्से में करीब दो फीट तक पानी भर गया हैं।


बारिश ने ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ को बनाया तालाब


गंगा एक्सप्रेसवे, उन्नाव के बशीरतगंज इलाके में तेज बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेसवे के एंट्री प्वाइंट, सर्विस रोड और टोल प्लाजा के आसपास पानी भर गया। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ जगहों पर पानी करीब दो फीट तक पहुंच गया। पानी टोल बूथ के अंदर भी पहुंचा, जिससे वहां काम करने वाले कर्मचारियों को परेशानी हुई। यहां तक कि टोल बूथ के अंदर भी पानी भर गया है।


कार-बाइक निकालना हुआ मुश्किल


गंगा एक्सप्रेसवे में जलभराव इतना बढ़ गया कि छोटे वाहनों और बाइक सवारों को पानी से होकर निकलना पड़ा। कुछ वाहन पानी में फंस गए। जलभराव वाले हिस्से में यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हुई। संबंधित एजेंसी की ओर से पानी निकालने के लिए पंप और अन्य इंतजाम किए गए। इसके बाद बहुत सी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है, जिससे सरकार पे सवाल उठाया जा रहा है।

बारिश में दूसरी बार सामने आई सड़क की समस्या

यह उन्नाव में इस मानसून के दौरान गंगा एक्सप्रेसवे पर सड़क क्षतिग्रस्त होने की दूसरी घटना बताई गई है। इससे पहले 17 अगस्त को सोनिक गांव के पास भी सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। उस समय सड़क किनारे की मिट्टी बहने से करीब 200 मीटर हिस्से पर असर पड़ा था और मरम्मत कराई गई थी। और इस बार बारिश के बीच गंगा एक्सप्रेसवे दूसरी बार भी ऐसा हुआ, बशीरतगंज टोल प्लाजा के पास सड़क का एक हिस्सा धंस गया। गड्ढा करीब 5 फीट चौड़ा और 7 फीट गहरा था। सूचना मिलते ही ट्रैफिक को प्रभावित हिस्से से पहले दूसरी लेन में डायवर्ट कर मरम्मत शुरू कर दी गई।


ड्रेनेज और रखरखाव पर उठे सवाल


गंगा एक्सप्रेसवे पर जलभराव और सड़क धंसने की घटनाओं के बाद बारिश के पानी की निकासी और सड़क के रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन घटनाओं से निर्माण में किसी निश्चित खामी का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। अधिकारियों की ओर से प्रभावित हिस्सों की मरम्मत और निगरानी की जा रही है।

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