नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी नवीनतम बैठक में सर्वसम्मति से बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने महंगाई के रुख और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया।

आरबीआई ने अपनी आर्थिक समीक्षा में अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9% रह सकती है, जो FY26 के अनुमानित 7.6% की तुलना में कम है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ते जोखिम, जिंस (कमोडिटी) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव अगले वित्त वर्ष में आर्थिक विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।
महंगाई के मोर्चे पर आरबीआई ने अनुमान लगाया है कि FY27 में खुदरा महंगाई (CPI Inflation) औसतन 4.6% रह सकती है, जो उसके निर्धारित लक्ष्य दायरे के भीतर है। हालांकि, बैंक ने यह भी चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाएं महंगाई पर ऊपर की ओर दबाव बना सकती हैं।
रेपो रेट को स्थिर रखने का उद्देश्य आर्थिक विकास को समर्थन देने और महंगाई को नियंत्रित रखने के बीच संतुलन बनाए रखना है। इस फैसले के बाद फिलहाल होम लोन, ऑटो लोन और बिजनेस लोन जैसी ऋण सुविधाओं की ब्याज दरों में तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, जिससे उधार लेने वालों को राहत मिल सकती है।












