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‘जब तक आरक्षण, तब तक आंदोलन’ – हंडिया की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, बारिश भी बेअसर

प्रयागराज के हंडिया तहसील परिसर में एक बड़ा सामाजिक आंदोलन देखने को मिला, जब भारी बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में लोग यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) बिल के समर्थन और आरक्षण बचाओ की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय के साथ-साथ भीम आर्मी के कार्यकर्ता और कई अधिवक्ता भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए अपने अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई और अंत में राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी हंडिया को सौंपा।

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के हंडिया में मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को UGC की नई इक्विटी नियमावली और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने हंडिया तहसील परिसर में नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें उठाईं और बाद में उपजिलाधिकारी हंडिया के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।प्रदर्शन में OBC, SC और ST समुदायों के लोगों के साथ भीम आर्मी के कार्यकर्ता और कई अधिवक्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने UGC की नई व्यवस्था को लेकर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की सुरक्षा तथा संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी संरक्षण की मांग की

देशभर में गरमाया यूजीसी नियमावली का मुद्दा

बीते कुछ हफ्तों से देशभर में “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026” को लेकर सामाजिक तापमान लगातार बढ़ा है। जहां एक तरफ सवर्ण समाज के कुछ संगठन इस नई नियमावली को वापस लिए जाने और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर आगरा, गाजीपुर और भदोही जैसे जिलों में प्रदर्शन कर चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय इसी नियमावली को मजबूती से लागू करने और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को सुरक्षित रखने की मांग के साथ सड़कों पर उतर रहा है। प्रयागराज का हंडिया प्रदर्शन इसी व्यापक सामाजिक हलचल की एक कड़ी है।

हंडिया में मंगलवार को उमड़ा जनसैलाब

प्रयागराज जिले के हंडिया तहसील परिसर में मंगलवार को हजारों लोग यूजीसी के समर्थन में जुटे। क्षेत्र के ओबीसी, एससी और एसटी समुदाय के लोगों के साथ-साथ भीम आर्मी के कार्यकर्ता और कई स्थानीय अधिवक्ता भी इस आयोजन में शामिल हुए, जिससे प्रदर्शन को व्यापक सामाजिक समर्थन मिला।

नारेबाजी, बैनर और ‘UGC बचाओ यात्रा’

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर जोरदार नारेबाजी की, जिसमें बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें भी नजर आईं। “यूजीसी बचाओ यात्रा” नाम से निकाला गया यह मार्च तहसील परिसर की ओर बढ़ा, जिसका मकसद राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपना था।

UGC की नई नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा विवाद

UGC की 2026 की इक्विटी नियमावली को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में इन नियमों को फिलहाल अबेयन्स में रखा था, जिसके बाद 2012 के नियम लागू रहने की स्थिति बनी। इसी मुद्दे को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध और समर्थन की आवाजें सामने आती रही हैं।

वक्ताओं की मांग — जल्द और प्रभावी क्रियान्वयन

मंच से बोलते हुए वक्ताओं ने सरकार से यूजीसी की इस नई नियमावली से जुड़े प्रावधानों को जल्द और प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की। उनका तर्क था कि सही क्रियान्वयन से देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में अवसरों की समानता सुनिश्चित होगी, जिसका सीधा फायदा वंचित तबकों से आने वाले छात्रों और शिक्षकों को मिलेगा।

राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन और आगे की चेतावनी

प्रदर्शन समाप्त होने के बाद आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी, हंडिया को सौंपा, जिसमें यूजीसी नियमावली को प्रभावी ढंग से लागू करने सहित अन्य मांगों पर तेजी से कार्रवाई की अपील की गई। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे संविधान के दायरे में रहकर लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेंगे। हंडिया का यह प्रदर्शन दिखाता है कि यूजीसी की नई नियमावली को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग सामाजिक तबकों के बीच राय बंटी हुई है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और आंदोलन देखने को मिल सकते हैं।

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