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महिला सुरक्षा पर योगी का दावा: यूपी में 44 हजार से ज्यादा महिला पुलिसकर्मी, क्या बदली तस्वीर?

योगी आदित्यनाथ ने यूपी में महिला सुरक्षा को लेकर सरकारी प्रयासों का उल्लेख किया। जानिए मिशन शक्ति, महिला पुलिस बल और सेफ सिटी परियोजना से जुड़ी अहम बातें।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपनी सरकार के प्रयासों और पिछले वर्षों में हुए बदलावों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठते थे, जबकि अब उत्तर प्रदेश महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण की दिशा में नई पहचान बना रहा है। उन्होंने मिशन शक्ति, महिला पुलिस बल, तकनीक आधारित निगरानी और जन-जागरूकता अभियानों को इस बदलाव का हिस्सा बताया।

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, सार्वजनिक स्थानों पर उनकी स्वतंत्र आवाजाही और शिकायतों पर पुलिस की कार्रवाई जैसे विषय लगातार चर्चा में हैं। सरकार की ओर से महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं और पुलिस व्यवस्था में बदलावों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन प्रयासों का वास्तविक प्रभाव जानने के लिए सरकारी दावों के साथ अपराध संबंधी आधिकारिक आंकड़ों का अध्ययन भी जरूरी है।

महिला पुलिस बल में बढ़ोतरी पर मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या पहले लगभग 10,000 थी, जो अब बढ़कर 44,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े मुख्यमंत्री के बयान के आधार पर प्रकाशित रिपोर्टों में सामने आए हैं। महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ने से थानों और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की शिकायतों को सुनने तथा पीड़ितों के साथ संवाद स्थापित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक आकलन करने के लिए यह भी देखना होगा कि महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती किन स्थानों पर है, शिकायतों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और पीड़ितों को किस स्तर तक सहायता मिलती है।

महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ने से थानों और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की शिकायतों को सुनने तथा पीड़ितों के साथ संवाद स्थापित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक आकलन करने के लिए यह भी देखना होगा कि महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती किन स्थानों पर है, शिकायतों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और पीड़ितों को किस स्तर तक सहायता मिलती है।

मिशन शक्ति से महिला सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश

उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन (WCSO) की स्थापना 18 अगस्त 2020 को की गई थी। इसकी इकाइयां प्रदेश के सभी 75 जिलों में हैं। संगठन महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों की रोकथाम, शिकायतों की निगरानी और सुरक्षा कार्यक्रमों के समन्वय का काम करता है।

महिला पावर लाइन 1090 इस व्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा है। इसका उद्देश्य महिलाओं को फोन, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से होने वाले उत्पीड़न की शिकायतों में सहायता उपलब्ध कराना है। आधिकारिक विवरण में मिशन शक्ति, सेफ सिटी परियोजना और महिला सहायता डेस्क को भी संगठन के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल किया गया है।

इन योजनाओं का उद्देश्य केवल शिकायतों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और सहायता प्राप्त करने के रास्तों की जानकारी देना भी है।

सेफ सिटी परियोजना और तकनीक आधारित निगरानी

महिला सुरक्षा के लिए सेफ सिटी परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है। उत्तर प्रदेश पुलिस के आधिकारिक विवरण में लखनऊ से जुड़ी परियोजना के तहत सीसीटीवी कैमरे, पिंक बूथ, महिला सहायता सुविधाएं और एकीकृत निगरानी व्यवस्था जैसे उपायों का उल्लेख है।

ऐसी व्यवस्थाएं संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर पुलिस की प्रतिक्रिया में सहायता कर सकती हैं। हालांकि, तकनीकी निगरानी की उपयोगिता इस बात पर भी निर्भर करती है कि कैमरे और अन्य उपकरण कितने प्रभावी ढंग से काम करते हैं, निगरानी केंद्रों से सूचना पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी सुलभ है।

मिशन शक्ति का नया चरण और जागरूकता अभियान

द टाइम्स ऑफ इंडिया की 12 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ पुलिस ने नवरात्रि के अवसर पर मिशन शक्ति का छठा चरण शुरू किया। इस अभियान में स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रमों के साथ साइबर सुरक्षा, महिला अधिकारों और उत्पीड़न रोकने पर जोर दिया जाना है। रिपोर्ट के अनुसार, पिंक बूथ और मिशन शक्ति केंद्र भी इस अभियान के प्रमुख हिस्से हैं।

इस तरह के अभियान महिलाओं और लड़कियों को ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर अपराध और सहायता के उपलब्ध माध्यमों के बारे में जानकारी देने में उपयोगी हो सकते हैं। इनकी सफलता का मूल्यांकन कार्यक्रमों की संख्या के साथ-साथ जागरूकता, शिकायतों की रिपोर्टिंग और सहायता की प्रभावशीलता के आधार पर भी किया जाना चाहिए।

महिला सुरक्षा के दावों का मूल्यांकन कैसे हो?

सरकार की ओर से महिला पुलिस बल और सुरक्षा योजनाओं के विस्तार को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया है। लेकिन प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की स्थिति समझने के लिए दर्ज मामलों, जांच की प्रगति, आरोपपत्र दाखिल होने, न्यायिक निस्तारण और दोषसिद्धि जैसे संकेतकों का अध्ययन जरूरी है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े इस विश्लेषण में उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, दर्ज अपराधों की संख्या में बदलाव को सीधे वास्तविक अपराध दर में वृद्धि या कमी का प्रमाण नहीं माना जा सकता, क्योंकि शिकायत दर्ज कराने की जागरूकता और पुलिस तक पहुंच में बदलाव भी आंकड़ों को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल उपलब्ध स्रोत मुख्यमंत्री के बयान और राज्य की महिला सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की पुष्टि करते हैं, लेकिन इनसे अकेले यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि 2017 के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कितनी कमी आई है।

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