पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने निर्वाचन आयोग से जनता का भरोसा दोबारा हासिल करने की अपील की है। उन्होंने क्रिकेट के अंपायर का उदाहरण देते हुए कहा है कि चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता पर संदेह होने से जीत की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है।
पूर्व निर्वाचन आयुक्त ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद और राजनीतिक विरोध प्रदर्शन जारी है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित अनियमिताओं पर सवाल उठाए है। इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर बहस तेज हुई है।
निष्पक्ष अंपायर की तरह काम करे चुनाव आयोग
अशोक लवासा ने कहा के लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका एक निष्पक्ष अंपायर जैसी होती है। जिस तरह क्रिकेट में अंपायर के फैसले पर संदेह होने से मैच के नतीजे पर सवाल उठ सकते हैं। उसी तरह आयोग की निष्पक्षता पर संदेह होने से चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों की सफलता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने आयोग से अपनी विश्वसनीयता और जनता का विश्वास फिर से मजबूत करने की उम्मीद जताई।
SIR प्रकिया को लेकर क्या विवाद है
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और संशोधन करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया में नाम को शामिल करने और हटाने के तरीके को लेकर सवाल उठाए जा रहे है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया, वहीं इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। इस मामले से जुड़े मुद्दे न्यायिक विचारधारा भी हैं।
पारदर्शिता और भरोसा बहाल करने पर जोर
अशोक लवासा के टिप्पणी का मुख्य संदेश यह है कि चुनाव आयोग को अपने कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए और जनता के मन में उठने वाले संदेहों का समाधान करना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता केवल मतदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को उस पक्रिया पर भरोसा होना भी जरूरी है। उनके अनुसार लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव और भरोसेमंद संस्थाएं अहम भूमिका निभाती है।
अशोक लवासा की सलाह ऐसे समय आई है, जब SIR को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर चर्चा हो रही है। उनका कहना है कि आयोग को अपनी निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। ।ताकि चुनाव के नतीजो पर जनता का भरोसा कायम रहे।










