इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में एक बार फिर प्रो. संगीता श्रीवास्तव की कमान तय हो गई है। उन्हें 5 साल के दूसरे कार्यकाल के लिए कुलपति नियुक्त किया गया है। आखिर क्यों दोबारा उन्हीं पर भरोसा जताया गया और उनके पहले कार्यकाल में विश्वविद्यालय में क्या बड़े बदलाव हुए? नए कार्यकाल में उनके सामने कौन-सी चुनौतियां होंगी? जानिए इस पूरी खबर में।
प्रयागराज: प्रयागराज स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति पद को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। प्रो. संगीता श्रीवास्तव को दूसरे कार्यकाल के लिए फिर कुलपति नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विश्वविद्यालय की विजिटर के रूप में उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी है। नया कार्यकाल 16 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा और यह पांच वर्ष या 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगा। यह नियुक्ति विश्वविद्यालय के इतिहास में खास मानी जा रही है, क्योंकि प्रो. श्रीवास्तव लगातार दूसरा पूर्ण कार्यकाल पाने वाली पहली कुलपति बनी हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने जारी किया नियुक्ति आदेश
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 22 सितंबर 2026 को नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किया गया। आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने प्रो. संगीता श्रीवास्तव को इलाहाबाद विश्वविद्यालय का कुलपति दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया है। उनकी सेवा की शर्तें विश्वविद्यालय के अधिनियम, परिनियम और अध्यादेशों में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार रहेंगी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रो. संगीता श्रीवास्तव को कुलपति के रूप में दर्ज किया गया है।
30 नवंबर 2020 को संभाली थी जिम्मेदारी
प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने 30 नवंबर 2020 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला था। वह विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति बनी थीं। रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद विश्वविद्यालय के अपने नियमित शिक्षक के कुलपति बनने का भी यह पहला मामला था। इससे पहले वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग से जुड़ी रही थीं। 2020 में कुलपति बनने से पहले वह विभागाध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुकी थीं।
पहले कार्यकाल में कई अहम बदलाव
प्रो. श्रीवास्तव के पहले कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव हुए। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनके कार्यकाल में बड़ी संख्या में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां तथा पदोन्नतियां हुईं। विश्वविद्यालय को उनके कार्यकाल के दौरान NAAC से A+ ग्रेड भी मिला। नवंबर 2025 में विश्वविद्यालय को 3.26 CGPA के साथ A+ ग्रेड मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी। यह केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद विश्वविद्यालय की पिछली B+ मान्यता से एक महत्वपूर्ण सुधार था।
NEP के अनुरूप शैक्षणिक बदलाव
विश्वविद्यालय ने प्रो. श्रीवास्तव के कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप कई शैक्षणिक बदलाव भी किए। इनमें चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को लागू करने का निर्णय और विद्यार्थियों के लिए skill-oriented courses शुरू करना शामिल रहा। 2025-26 सत्र से BA, BSc और BCom में चार वर्षीय undergraduate structure लागू करने का फैसला लिया गया था। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 के विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों और गतिविधियों में भी प्रो. संगीता श्रीवास्तव को कुलपति के रूप में दर्ज किया गया है।
नया कार्यकाल कब से लागू हुआ?
नए कार्यकाल की प्रभावी तारीख 16 सितंबर 2026 है। आदेश के मुताबिक कार्यकाल पांच वर्ष या 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगा, जो भी पहले हो। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब विश्वविद्यालय अपने अगले चरण में अकादमिक गुणवत्ता, शोध, infrastructure और NEP आधारित शिक्षा को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। प्रो. श्रीवास्तव के सामने अब दूसरे कार्यकाल में इन पहलों को और मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी।
23 सितंबर को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस भी
इस फैसले का समय भी खास रहा। नियुक्ति आदेश 22 सितंबर को जारी हुआ और विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी 23 सितंबर को मिली। 23 सितंबर इलाहाबाद विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस है। विश्वविद्यालय की स्थापना 23 सितंबर 1887 को हुई थी।अब दूसरे कार्यकाल में विश्वविद्यालय के सामने शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, बुनियादी ढांचे और संस्थागत विकास को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। प्रो. संगीता श्रीवास्तव की पुनर्नियुक्ति से इन क्षेत्रों में जारी योजनाओं को आगे बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है।











