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प्रयागराज माघ मेला 2027: मौनी अमावस्या पर टूट सकता है भीड़ का रिकॉर्ड, 5 करोड़ श्रद्धालुओं का अनुमान

प्रयागराज में माघ मेला 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक मौनी अमावस्या पर 4.75 से 5 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मेले का आयोजन 14 जनवरी से 6 मार्च तक प्रस्तावित है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए पार्किंग, यातायात, पुल, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।

प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में माघ मेला 2027 को लेकर प्रशासनिक तैयारियों का ढांचा तैयार किया जा रहा है। अगले माघ मेले में प्रमुख स्नान पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इनमें मौनी अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व रहने वाला है। ताजा अनुमान के मुताबिक इस दिन 4.75 करोड़ से 5 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच सकते हैं। यह आंकड़ा 2026 में मौनी अमावस्या पर दर्ज करीब 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं की संख्या से अधिक है।

DRM कार्यालय में हुई अहम बैठक

माघ मेला 2027 की तैयारियों को लेकर गुरुवार को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक की अध्यक्षता DRM रंजीश अग्रवाल ने की, जबकि पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया, मंडलायुक्त लोकेश एम और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा भी इसमें शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को लेकर रेलवे, जिला प्रशासन और मेला प्राधिकरण के बीच बेहतर तालमेल बनाना था।

50 दिन तक चलेगा आयोजन, छह प्रमुख स्नान पर्व

प्रयागराज मेला प्राधिकरण की घोषित तिथियों के अनुसार माघ मेला 2027 का आयोजन 15 जनवरी से 6 मार्च तक होगा। पहला प्रमुख स्नान मकर संक्रांति पर 15 जनवरी को होगा। इसके बाद 22 जनवरी को पौष पूर्णिमा, 6 फरवरी को मौनी अमावस्या, 11 फरवरी को वसंत पंचमी, 20 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 6 मार्च को महाशिवरात्रि का स्नान होगा। इनमें मौनी अमावस्या को सबसे अहम स्नान पर्व माना जा रहा है। इसी दिन संभावित 5 करोड़ तक की भीड़ को देखते हुए प्रशासन को व्यापक स्तर पर भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन करना होगा।

बढ़ेगा मेला क्षेत्र, आठ सेक्टर में बसाने की तैयारी

2027 के आयोजन के लिए मेला क्षेत्र को पिछले करीब 844 हेक्टेयर से बढ़ाकर 900 से 925 हेक्टेयर के बीच करने की योजना बताई गई है। वहीं सेक्टरों की संख्या सात से बढ़ाकर आठ किए जाने की तैयारी है। इससे श्रद्धालुओं के लिए अधिक स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

यातायात और पार्किंग पर रहेगा विशेष फोकस

मेला अवधि में सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन की होगी। प्रशासन की तैयारियों में पार्किंग क्षमता बढ़ाने, वाहनों के दबाव को अलग-अलग मार्गों पर बांटने और भीड़ के अनुसार यातायात प्रबंधन की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।2025 के महाकुंभ के अनुभव के बाद प्रयागराज में बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन के पास काफी अनुभव भी है।

सुरक्षा और स्वच्छता की भी होगी बड़ी जिम्मेदारी

करोड़ों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन के कारण सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान देना होगा। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक प्रशासन बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा तंत्र को बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। प्रयागराज जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी जिले से जुड़े प्रशासनिक अपडेट, हेल्पलाइन और आपदा प्रबंधन जैसी सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध है

रेलवे स्टेशनों पर खास इंतजाम

भीड़ प्रबंधन के लिए प्रयागराज जंक्शन, प्रयागराज छिवकी, नैनी और सुबेदारगंज स्टेशनों को प्रमुख रेलवे पॉइंट के तौर पर चिन्हित किया गया है, जहां से मेले में आने वाले यात्रियों को संभाला जाएगा। बैठक में यह भी सहमति बनी कि रेलवे और सिविल प्रशासन के अधिकारी मिलकर प्रमुख स्टेशनों का संयुक्त सर्वे करेंगे, ताकि यात्रियों की आवाजाही और अन्य जरूरी सुविधाओं का सही आकलन किया जा सके।

फैसिलिटी स्लिप, अस्थायी अस्पताल और शौचालयों की व्यवस्था

अधिकारियों के मुताबिक, मेला क्षेत्र में फैसिलिटी स्लिप की आपूर्ति, अस्थायी अस्पतालों की स्थापना व रखरखाव और शिविरों में किराए के शौचालयों की व्यवस्था के लिए भी अलग-अलग एजेंसियों का चयन किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सारी व्यवस्थाएं इस तरह से योजनाबद्ध की जा रही हैं कि बाढ़ का पानी उतरते ही काम तुरंत शुरू किया जा सके।

मेले के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं से बचने का सुझाव

DRM रंजीश अग्रवाल ने बैठक में एक अहम सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि माघ मेला अवधि के दौरान प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित नहीं की जानी चाहिए। उनके मुताबिक इससे सड़कों और सार्वजनिक परिवहन पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से बचा जा सकेगा, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों दोनों को होने वाली असुविधा भी कम होगी।

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