रविवार सुबह करीब 3:45 पर बढ़े जलस्तर के बीच श्री लेटे हनुमान(बड़े हनुमान जी)की प्रतिमा तक पहुंचा गंगा जल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर गया। संतों के अनुसार इसे सम्पूर्ण सृष्टि के लिए बहुत शुभ और मंगलकारी संकेत माना जाता है।इस दृश्य को देखने के लिए श्रद्धालुओं का लगा तांता।
प्रयागराज। 30 अगस्त 2026 की सुबह करीब 3:45 बजे प्रयागराज के संगम तट स्थित श्री बड़े हनुमान मंदिर परिसर में एक अनोखा नजारा देखने को मिला। गंगा का जल गर्भगृह की सीढ़ियां पार कर मंदिर के भीतर पहुंच गया, जिससे वहां विराजमान श्री लेटे हनुमान जी की प्रतिमा पूरी तरह जलमग्न हो गई। वहां मौजूद पुजारियों और सेवादारों को इसकी जानकारी होते ही मंदिर से जुड़े संतों और महंतों ने इस घटना की पुष्टि की। महंत बलबीर गिरी सहित अन्य संतों ने बताया कि गंगा मां द्वारा स्वयं हनुमान जी को स्नान कराया जाना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। खबर फैलते ही आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए संगम तट की ओर उमड़ पड़े, और मंदिर परिसर “जय बजरंगबली” के जयकारों से गूंजता रहा। जल गर्भगृह में पहुंचते ही मंदिर में धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच गंगा मां के आगमन की भव्य आरती की गई और मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा-पाठ संपन्न कराया गया। इसके पश्चात हनुमान जी को शयन अवस्था में विराजमान कर मंदिर के कपाट बंद किए गए।
क्यों है यह खास
संतों के अनुसार, संगम पर गंगा का जल हर वर्ष एक निश्चित सीमा तक बढ़ने पर ही मंदिर के गर्भगृह(बड़े हनुमान जी)तक पहुंचता है, इसलिए इस दृश्य को दुर्लभ और अत्यंत पवित्र माना जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यह पूरी सृष्टि के लिए सुख-समृद्धि और मंगल का प्रतीक है, और जो भक्त इस दृश्य के साक्षी बनते हैं, उन्हें विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर के बीच संगम तट पर बना यह आध्यात्मिक दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आस्था और उल्लास का बड़ा कारण बन गया। मंदिर प्रशासन जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है, वहीं भक्तों में इस दुर्लभ पल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।













