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14 दिन बाद खुले संकटमोचन के कपाट, प्रयागराज लेटे हनुमान मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

प्रयागराज के प्रसिद्ध लेटे हनुमान मंदिर में 14 दिन बाद कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। संकटमोचन के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे और पूरे परिसर में आस्था का माहौल नजर आया।

प्रयागराज। संगम तट पर स्थित आस्था के महाकेंद्र श्री लेटे हनुमान मंदिर के कपाट शनिवार शाम करीब 14 दिनों के लंबे इंतजार के बाद श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए गए। मंदिर खुलते ही संगम क्षेत्र में भक्ति और आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।

गंगा मां ने खुद कराया हनुमान जी को स्नान

प्रयागराज में बीते कुछ हफ्तों से गंगा-यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। नतीजा यह हुआ कि संगम किनारे स्थित लेटे हनुमान मंदिर का गर्भगृह पूरी तरह पानी में डूब गया। मान्यता है कि जब गंगा का जल स्वयं हनुमान जी के गर्भगृह तक पहुंचता है, तो यह गंगा मां द्वारा बजरंगबली को स्नान कराए जाने के समान माना जाता है। और श्रद्धालु इसे बेहद शुभ संकेत के रूप में देखते हैं। इस दौरान करीब 14 दिनों तक मंदिर में सामान्य दर्शन-पूजन पूरी तरह बंद रहा।

जलस्तर घटा, तो शुरू हुई सफाई और पूजन की प्रक्रिया

शनिवार को गंगा-यमुना का जलस्तर घटने के बाद मंदिर प्रशासन और सेवादारों ने तुरंत गर्भगृह से पानी निकालने और विशेष सफाई का काम शुरू किया। सफाई पूरी होने के बाद मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद श्री लेटे हनुमान जी का भव्य श्रृंगार किया गया और संध्या महाआरती के साथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

दर्शन के लिए उमड़े भक्त, गूंजे जयकारे

मंदिर खुलने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम क्षेत्र की ओर दौड़ पड़े। भक्तों ने “जय बजरंगबली” के जयकारे लगाते हुए कतारबद्ध होकर संकटमोचन के दर्शन किए। मंदिर परिसर में देर शाम तक दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा

हर साल बनता है यह अनोखा संयोग

गौर करने वाली बात यह है कि प्रयागराज में बाढ़ के दौरान संगम स्थित लेटे हनुमान मंदिर में जलभराव की यह घटना लगभग हर वर्ष होती है। पिछले वर्षों में भी गंगा-यमुना के जलस्तर बढ़ने पर मंदिर को कई-कई दिनों तक बंद करना पड़ा है, और हर बार जलस्तर घटने के बाद इसी परंपरा के साथ मंदिर को दोबारा खोला जाता है। श्रद्धालु इसे आस्था और प्रकृति के मिलन का प्रतीक मानते हैं।

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