प्रयागराज के नैनी क्षेत्र में BPCL की 231 एकड़ जमीन को औद्योगिक विकास से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। यह जमीन करीब 352 एकड़ के Integrated Manufacturing Cluster (IMC) Prayagraj का हिस्सा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पूरे IMC में ₹1,600 करोड़ के निवेश की क्षमता और 17,700 रोजगार की संभावना है। साथ ही होटल, मैरिज लॉन और गोल्फ कोर्स जैसी सुविधाओं के प्रस्ताव पर भी काम हो रहा है।
प्रयागराज: प्रयागराज के नैनी औद्योगिक क्षेत्र में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत पंप्स एंड कंप्रेशर्स लिमिटेड (BPCL) की करीब 231 एकड़ जमीन पर औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी चल रही है। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) इस क्षेत्र के सुनियोजित विकास की दिशा में काम कर रहा है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार यहां औद्योगिक इकाइयों के साथ व्यावसायिक और मनोरंजन से जुड़ी परियोजनाओं की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
हालांकि, यहां एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। 231 एकड़ पूरे IMC का क्षेत्रफल नहीं है। आधिकारिक परियोजना दस्तावेज के मुताबिक IMC प्रयागराज के विकास कार्यों में BPCL की 231 एकड़ जमीन और करीब 121 एकड़ अन्य क्षेत्र शामिल है। कुल परियोजना क्षेत्र लगभग 351-352 एकड़ है।
₹1,600 करोड़ के निवेश की क्षमता
प्रयागराज का Integrated Manufacturing Cluster यानी IMC Prayagraj, अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) के तहत विकसित किया जा रहा है। केंद्र सरकार और NICDC के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस परियोजना का क्षेत्रफल 352 एकड़, परियोजना लागत ₹658 करोड़, संभावित निवेश ₹1,600 करोड़ और रोजगार क्षमता 17,700 नौकरियों की है। केंद्र सरकार ने नवंबर 2024 में NICDC, उत्तर प्रदेश सरकार और UPSIDA के बीच समझौतों के बाद परियोजना के विकास का ढांचा आगे बढ़ाया था। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य स्थानीय विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।
केंद्र सरकार ने नवंबर 2024 में NICDC, उत्तर प्रदेश सरकार और UPSIDA के बीच समझौतों के बाद परियोजना के विकास का ढांचा आगे बढ़ाया था। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य स्थानीय विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।
किन उद्योगों पर रहेगा फोकस?
IMC Prayagraj को अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों के लिए विकसित करने की योजना है। NICDC के मुताबिक यहां ई-मोबिलिटी आधारित ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग एवं बेवरेज, रेडीमेड गारमेंट्स, साइकिल मैन्युफैक्चरिंग, लेदर उत्पाद और पैकेजिंग जैसे सेक्टरों पर फोकस रहेगा। इन उद्योगों के आने से केवल बड़ी विनिर्माण इकाइयों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि उनके आसपास सप्लाई, परिवहन, पैकेजिंग, मरम्मत, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक कारोबार भी विकसित हो सकते हैं। इससे स्थानीय छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए भी बाजार बढ़ने की संभावना है।
10 हजार से ज्यादा रोजगार की चर्चा
नैनी की 231 एकड़ जमीन से जुड़ी ताजा स्थानीय रिपोर्ट में 10 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना बताई गई है। वहीं, केंद्र सरकार का आधिकारिक आंकड़ा पूरे 352 एकड़ के IMC के लिए 17,700 रोजगार की क्षमता बताता है। इसलिए दोनों आंकड़ों को अलग-अलग दायरे में समझना जरूरी है। औद्योगिक इकाइयों में तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत होगी। इसके अलावा परिवहन, सुरक्षा, रखरखाव, होटल, खानपान और अन्य सेवा क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
होटल और मैरिज लॉन भी होंगे विकास का हिस्सा
औद्योगिक गतिविधियों के साथ क्षेत्र में व्यावसायिक सुविधाओं को बढ़ाने की योजना भी सामने आई है। 2 अक्टूबर 2026 को UPSIDA के CEO बलकार सिंह ने IMC, सरस्वती हाईटेक सिटी और नैनी औद्योगिक क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान खाली BPCL भूखंडों पर लक्जरी होटल और मैरिज लॉन जैसी परियोजनाओं को PPP यानी Public-Private Partnership मॉडल के तहत विकसित करने पर चर्चा हुई।
इसका उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्र के आसपास कारोबारी और सेवा गतिविधियों का ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है, जिससे निवेशकों और यहां काम करने वाले लोगों को आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।
100 एकड़ में गोल्फ कोर्स का प्रस्ताव
प्रयागराज की इस योजना में सबसे अलग प्रस्ताव गोल्फ कोर्स का है। सरस्वती हाईटेक सिटी में करीब 100 एकड़ क्षेत्र में 18-होल गोल्फ कोर्स विकसित करने की तैयारी की खबर सामने आई है। इसके साथ करीब 10 एकड़ में रिसॉर्ट और बजट होटल विकसित करने का प्रस्ताव भी बताया गया है।हालांकि, इन परियोजनाओं को अभी अंतिम रूप से बनी हुई सुविधाएं नहीं माना जा सकता। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक इनके लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं और मंजूरी तथा नीतिगत प्रक्रिया आगे बढ़नी है। इसलिए गोल्फ कोर्स और होटल को फिलहाल प्रस्तावित परियोजना के रूप में ही देखना उचित होगा।
परियोजना पर काम कहां तक पहुंचा?
IMC Prayagraj को केंद्र सरकार ने अगस्त 2024 में मंजूरी दी थी। नवंबर 2024 में संबंधित समझौते हुए और जनवरी 2025 में परियोजना के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी यानी SPV का गठन किया गया। उत्तर प्रदेश की SEIAA ने मार्च 2025 में पर्यावरणीय मंजूरी भी प्रदान की। फरवरी 2026 की केंद्र सरकार की जानकारी के अनुसार 12 नए औद्योगिक शहरों की परियोजनाओं में सभी के SPV गठित किए जा चुके थे। IMC Prayagraj भी इस सूची में शामिल था।
कनेक्टिविटी बनेगी बड़ी ताकत
IMC Prayagraj की एक बड़ी विशेषता इसकी कनेक्टिविटी है। NICDC के अनुसार परियोजना स्थल NH-35 से जुड़ा है, जबकि NH-30 करीब 10 किलोमीटर दूर है। प्रयागराज एयरपोर्ट लगभग 24 किलोमीटर, न्यू करछना EDFC स्टेशन करीब 7 किलोमीटर और नैनी ICD करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसी कनेक्टिविटी औद्योगिक माल की आवाजाही और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।











