14/15 जनवरी से शुरू होने वाले माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान, सड़क, पानी, पार्किंग, सफाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी
प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज में माघ मेला 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रशासन इस बार मेले को पिछले आयोजन की तुलना में ज्यादा व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने की तैयारी में जुटा है। प्रस्तावित योजना के तहत मेला क्षेत्र को करीब 900 से 925 हेक्टेयर तक बढ़ाया जा सकता है। श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाने के लिए 9 पांटून पुल तैयार करने की योजना है। इसके अलावा सड़क, पेयजल, जल निकासी, पार्किंग, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
900 से 925 हेक्टेयर तक हो सकता है मेला क्षेत्र
प्रशासनिक तैयारियों के अनुसार पिछले माघ मेले में करीब 844 हेक्टेयर क्षेत्र का इस्तेमाल किया गया था। इस बार श्रद्धालुओं की संभावित बढ़ी संख्या को देखते हुए मेला क्षेत्र का विस्तार प्रस्तावित है। शुरुआती योजना में करीब 900 से 925 हेक्टेयर क्षेत्र में मेला बसाने की बात सामने आई है।मेला क्षेत्र को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर सुविधाओं को व्यवस्थित करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की भीड़ को एक ही स्थान पर जमा होने से रोकना और अलग-अलग मार्गों से उनका आवागमन सुनिश्चित करना है।
9 पांटून पुलों से सुगम होगा आवागमन
माघ मेले में श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए 9 पांटून पुल बनाए जाने की योजना है। इनमें कुछ पुल संगम और दारागंज क्षेत्र की ओर तथा अन्य पुल यमुना और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने के लिए प्रस्तावित हैं।पांटून पुल मेला क्षेत्र में अस्थायी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होते हैं। प्रमुख स्नान पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए इन पुलों पर पैदल यातायात को व्यवस्थित करने और भीड़ का दबाव कम करने की तैयारी की जा रही है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कुछ शुरुआती रिपोर्टों में 11 पांटून पुलों का उल्लेख हुआ था, लेकिन बाद की उपलब्ध रिपोर्टों और प्रशासनिक तैयारियों में 9 पुलों की योजना सामने आई है। इसलिए 9 पांटून पुल का आंकड़ा अधिक विश्वसनीय माना जा रहा है।
200 किलोमीटर तक चकर्ड प्लेट मार्ग की तैयारी
मेला क्षेत्र में सड़क और पैदल आवागमन को बेहतर बनाने के लिए बड़ी संख्या में अस्थायी मार्ग तैयार किए जाएंगे। रिपोर्टों के अनुसार करीब 200 किलोमीटर तक चकर्ड प्लेट मार्ग बनाने की योजना है। जमीन उपलब्ध होने के बाद समतलीकरण और सड़क निर्माण का काम तेजी से शुरू किया जाएगा।इसके साथ ही पेयजल और जल निकासी की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासनिक समीक्षा में मेला क्षेत्र में उपलब्ध बोरवेल और पाइपलाइन व्यवस्था का भी आकलन किया गया है।
बाढ़ का पानी घटना सबसे बड़ी चुनौती
फिलहाल मेला तैयारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गंगा और यमुना के बाढ़ के पानी की है। अक्टूबर की शुरुआत तक मेला क्षेत्र के कई हिस्सों में पानी मौजूद था। जमीन खाली होने के बाद ही बड़े स्तर पर समतलीकरण, सड़क और अन्य अस्थायी निर्माण कार्य शुरू किए जा सकेंगे।प्रशासन की कोशिश है कि टेंडर प्रक्रिया पहले पूरी कर ली जाए, ताकि जमीन उपलब्ध होते ही निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सके।
मौनी अमावस्या पर पांच करोड़ तक श्रद्धालुओं का अनुमान
माघ मेले में इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन और रेलवे की तैयारियों में मौनी अमावस्या पर करीब 4.75 से 5 करोड़ श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को ध्यान में रखा जा रहा है।इसी वजह से पार्किंग, ट्रैफिक, रेलवे, बस संचालन, पैदल मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया जा रहा है।
कब से कब तक चलेगा माघ मेला 2027?
उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी के अनुसार माघ मेला 2027 का आयोजन जनवरी 2027 से 6 मार्च 2027 तक प्रस्तावित है। प्रमुख स्नान पर्वों में मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि शामिल हैं।











