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बोधगया में पर्यटन कारोबार को बड़ा झटका, सैलानियों की घटती संख्या ने बढ़ाई चिंता

“बोधगया पर्यटन स्थल पर सैलानियों की कम आवाजाही”
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नेपाल में आई भीषण त्रासदी का असर अब बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया तक पहुंच गया है। हर साल सितंबर में पितृपक्ष मेले और उसके बाद के बौद्ध पर्यटन सीजन को लेकर तैयारियों में जुटने वाले बोधगया के होटल, ट्रैवल्स और अन्य व्यवसायी इस बार गहरे संकट में हैं। नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं ने होटल बुकिंग रद्द करनी शुरू कर दी है, जिससे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

गयाजी: पितृपक्ष मेले पर मंडराया संकट

विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला गयाजी में इस साल 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ शुरू होगा और इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 को अमावस्या के दिन होगा। जिला प्रशासन, गयावाल पंडा समाज और स्थानीय कारोबारी मेले की तैयारियों में जुटे हैं। लेकिन नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही का साया अब इस मेले पर भी मंडराने लगा है। हर साल गयाजी में पिंडदान के लिए नेपाल से करीब 40 से 50 हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इस बार करीब 25 प्रतिशत परिवार अपनी यात्रा टाल सकते हैं।गयाजी के पंडा समाज के नेपाली पुरोहित राम कुमार ओझा ने बताया कि आठ से दस जगहों पर नेपाली श्रद्धालुओं के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है, लेकिन नेपाल के मौजूदा हालात को देखते हुए लोगों का आना मुश्किल लग रहा है। उन्होंने बताया कि बाढ़ और आर्थिक नुकसान के चलते बड़ी संख्या में परिवार इस बार पिंडदान की यात्रा टाल सकते हैं, जिसका असर धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। गयाजी शहर के नेपाली धर्मशाला के आसपास फूल-माला, कपड़ा, पूजन सामग्री और मिठाई की दुकानों का बड़ा कारोबार पितृपक्ष मेले पर ही टिका रहता है। कारोबारियों का कहना है कि नेपाली श्रद्धालुओं की संख्या घटने से करोड़ों रुपये के व्यवसाय पर सीधा असर पड़ सकता है।

नेपाली श्रद्धालुओं ने सुनाई तबाही की आपबीती

गयाजी पहुंचे नेपाली श्रद्धालु राजकुमार ने बताया कि नेपाल और तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में भीषण तबाही मची है, और रसुवा जिले में सबसे ज्यादा लोगों की मौत हुई है। एक अन्य श्रद्धालु बिगु राय ने बताया कि रसुवा समेत तीन जिलों में हालात काफी गंभीर हैं, हालांकि उनके अपने इलाके में स्थिति अभी ठीक है। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्हें गयाजी पहुंचने के बाद ही बाढ़ की पूरी जानकारी मिली और कई घरों-परिवारों के बह जाने की खबरें सामने आई हैं।

नेपाल से घटेगी श्रद्धालुओं की संख्या

ऑल इंडिया भिक्षु संघ के महामंत्री प्रज्ञादीप ने बताया कि नेपाल में आई त्रासदी का असर वहां के आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार लगातार नेपाल की मदद कर रही है, जिससे राहत और बचाव कार्य को गति मिली है। उन्होंने कहा कि सितंबर में पिंडदान के लिए हर साल बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालु बोधगया आते हैं, लेकिन इस बार उनकी संख्या में कमी की पूरी संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा बोधगया आते भी हैं, तो नेपाल और तिब्बत से श्रद्धालुओं का पहुंचना मुश्किल होगा, क्योंकि प्रभावित इलाकों में आवागमन और संसाधनों की भारी कमी है।

होटल कारोबारियों की बुकिंग रद्द होनी शुरू

बोधगया होटल एसोसिएशन के महासचिव एवं होटल व्यवसायी सुदामा ने बताया कि नेपाल की त्रासदी का सीधा असर बोधगया के होटल कारोबार पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पितृपक्ष के दौरान नेपाल से बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु आते हैं, जबकि दलाई लामा के आगमन के समय नेपाल और तिब्बत से बौद्ध अनुयायियों की भी अच्छी तादाद रहती है। उन्होंने बताया कि नेपाल के कई पर्यटकों ने पहले से कराई गई बुकिंग रद्द कर दी है, क्योंकि उनके परिवार के सदस्य आपदा में लापता हैं या जान गंवा चुके हैं। सुदामा के अनुसार, इस बार प्रभावित इलाकों से श्रद्धालुओं के न आने की आशंका है, जिससे होटल कारोबार को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

टूर एंड ट्रैवल्स कारोबार पर भी संकट के बादल

टूर एंड ट्रैवल्स सदस्य एवं बस मालिक दीपक कुमार ने बताया कि बोधगया का बड़ा हिस्सा बौद्ध देशों से आने वाले पर्यटकों पर निर्भर करता है, और इनमें नेपाल सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि नेपाली श्रद्धालु आमतौर पर 10 से 15 दिनों तक बोधगया में ठहरते हैं, जिससे स्थानीय कारोबार को बड़ा सहारा मिलता है। इस बार त्रासदी के कारण यह पूरा गणित बिगड़ता नजर आ रहा है।

राहत कार्य में जुटीं भारत और बिहार सरकार

बोधगया और गया में फंसे लोगों को लेकर बताया गया कि भारत सरकार और बिहार सरकार लगातार राहत कार्य में जुटी हैं। जानकारी के अनुसार, बोधगया के ईशा फाउंडेशन से जुड़े कुछ लोग भी नेपाल में फंसे थे, जिन्हें सुरक्षित वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है।

धार्मिक पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर संकट

बोधगया की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर धार्मिक पर्यटन पर टिकी है, और नेपाल इसका सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। पितृपक्ष मेले और दलाई लामा के प्रस्तावित दौरे से कारोबारियों को जो बड़ी उम्मीदें थीं, नेपाल की तबाही ने उन पर पानी फेर दिया है। अब पूरे बोधगया की निगाहें नेपाल में हालात सामान्य होने और श्रद्धालुओं की आमद बहाल होने पर टिकी हैं।

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