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तेज प्रताप यादव की पोस्ट पड़ी भारी मंत्री संजय सिंह ने ठोका 50 करोड़ का मानहानि केस

संजय सिंह ने तेज प्रताप यादव को भेजा मानहानि नोटिस
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बिहार सरकार में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री और महुआ के विधायक संजय सिंह ने JJD नेता तेज प्रताप यादव के एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट को झूठा और आधारहीन बताते हुए भेजी कानूनी चेतावनी

बिहार की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। राज्य सरकार में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री और महुआ विधानसभा क्षेत्र से विधायक संजय सिंह ने जन जन दल (JJD) नेता तेज प्रताप यादव को एक कड़ा कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में मंत्री ने अपनी छवि खराब करने,जिसमें दिल्ली के एक होटल में एक युवती के साथ कथित अभद्र व्यवहार और करीब 25 लाख रुपए के कथित लेन-देन से जुड़े आरोप लगाए गए थे।नोटिस पूर्व मंत्री और JJD नेता तेज प्रताप यादव के नाम पते 10 सर्कुलर रोड, फुलवारी, पटना पर भेजा गया है, साथ ही इसे उनके व्हाट्सऐप नंबरों और ईमेल पर भी भेजा गया।

29 अगस्त की पोस्ट बनी विवाद की जड़

आरोप है कि तेज प्रताप यादव के कथित सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट प्रकाशित हुई, जिसमें संजय सिंह से जुड़े कई गंभीर और निजी आरोप लगाए गए थे। मंत्री पक्ष का कहना है कि ये आरोप तथ्यात्मक आधार के बिना लगाए गए और इनसे उनकी सार्वजनिक व राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। विवादित पोस्ट कथित तौर पर 29 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया अकाउंट से प्रकाशित हुई थी, जिसके अगले ही दिन यानी 30 अगस्त 2026 को कानूनी नोटिस जारी कर दिया गया। यह पूरा विवाद बिहार की राजनीति से जुड़ा है, जहां संजय सिंह महुआ सीट से विधायक हैं और मंत्री पद पर हैं

48 घंटे की समयसीमा,वरना कार्रवाई की चेतावनी

मंत्री पक्ष का दावा है कि सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए आरोप न सिर्फ झूठे और आधारहीन हैं, बल्कि इनका मकसद उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना था, इसलिए कानूनी रास्ता अपनाया गया। नोटिस में तेज प्रताप यादव को 48 घंटे के भीतर विवादित पोस्ट हटाने, सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने और भविष्य में ऐसे आरोप न लगाने की चेतावनी दी गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि तय समयसीमा में मांगों का पालन नहीं हुआ, तो संजय सिंह की ओर से दीवानी (सिविल) और आपराधिक, दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है, जिसमें 50 करोड़ रुपये के मानहानि हर्जाने का दावा भी शामिल है।

आरोप अभी सिर्फ दावा है,स्थापित तथ्य नहीं

गौरतलब है कि अब तक इन आरोपों की किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल इन्हें सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, स्थापित तथ्य के रूप में नहीं। साथ ही, 50 करोड़ रुपये की राशि भी केवल कानूनी नोटिस में की गई मांग है, इसे अदालत द्वारा तय की गई क्षतिपूर्ति नहीं माना जा सकता।तेज प्रताप का पक्ष अभी नहीं आया सामने फिलहाल इस पूरे मामले पर तेज प्रताप यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनका पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।

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