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प्रयागराज में टोल का झंझट खत्म! 9.9 KM सिक्स-लेन पुल पर नहीं रुकेगी गाड़ी, Free-Flow सिस्टम को मंजूरी

प्रयागराज के मलाक हरहर से स्टेनली रोड तक बन रहे करीब 9.9 किलोमीटर लंबे सिक्स-लेन पुल पर टोल व्यवस्था को आधुनिक बनाने की तैयारी है। मलाक हरहर टोल प्लाजा पर Multi-Lane Free Flow सिस्टम को मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे वाहनों को टोल बैरियर पर रुकने या गति कम करने की जरूरत नहीं होगी।

प्रयागराज: संगम नगरी में बन रहे बहुप्रतीक्षित सिक्स-लेन गंगा पुल से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। मलाक हरहर से स्टेनली रोड तक करीब 9.9 किलोमीटर लंबे पुल के मलाक हरहर छोर पर बनाए जा रहे टोल प्लाजा में अब आधुनिक Multi-Lane Free Flow (MLFF) Tolling System लागू करने की तैयारी है। इसकी मंजूरी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से मिलने की जानकारी सामने आई है। इस सिस्टम की खासियत यह होगी कि वाहन को पारंपरिक टोल बैरियर पर रुककर भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम वाहन की पहचान करेगा और टोल भुगतान की प्रक्रिया FASTag के जरिए पूरी की जाएगी। इसका उद्देश्य टोल प्लाजा पर वाहनों की कतार और अनावश्यक रुकावट को कम करना है।

कैसे काम करेगा Free-Flow Toll System?

MLFF यानी Multi-Lane Free Flow व्यवस्था में टोल प्लाजा पर सामान्य बैरियर हटाकर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और टोल कलेक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। वाहन निर्धारित लेन से गुजरता है और वहां लगे कैमरे तथा अन्य तकनीकी उपकरण वाहन और FASTag की पहचान कर सकते हैं।

NHAI देश के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी इस तकनीक को लागू कर रहा है। अगस्त 2026 में दिल्ली-जयपुर खंड के शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर MLFF प्रणाली शुरू किए जाने की जानकारी PIB ने दी थी। आधिकारिक बयान के अनुसार इसका उद्देश्य यात्रियों को तेज, सुगम और बाधा-मुक्त यात्रा उपलब्ध कराना है।

9.9 KM का सिक्स-लेन पुल, लागत करीब 1,947 करोड़

स्टेनली रोड के कलश चौराहे से मलाक हरहर तक गंगा पर बन रहा यह पुल करीब 9.8-9.9 किलोमीटर लंबा है। अलग-अलग रिपोर्टों में इसकी लंबाई 9.8 और 9.9 किलोमीटर बताई गई है। परियोजना की लागत करीब 1,947 करोड़ रुपये बताई गई है। निर्माण कार्य फरवरी 2021 में शुरू हुआ था।

पुल तैयार होने के बाद प्रयागराज से प्रतापगढ़, अयोध्या और लखनऊ की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक और बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इससे फाफामऊ और तेलियरगंज जैसे इलाकों में यातायात दबाव कम होने की संभावना भी जताई गई है।

अक्टूबर में होगी लोड टेस्टिंग

पुल को यातायात के लिए खोलने से पहले उसकी मजबूती और सुरक्षा की जांच की जा रही है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार शेष हिस्से की लोड टेस्टिंग 10 से 30 अक्टूबर के बीच कराने की तैयारी है। वहीं गंगा के ऊपर बने करीब 860 मीटर लंबे एक्स्ट्रा-डोज हिस्से की लोड टेस्टिंग 15 नवंबर से कराने की योजना बताई गई है। लोड टेस्टिंग का उद्देश्य पुल पर निर्धारित भार के दौरान उसकी संरचनात्मक क्षमता और सुरक्षा मानकों की जांच करना है। इसके अलावा सड़क पर डामरीकरण और अन्य फिनिशिंग कार्य भी किए जा रहे हैं।

नवंबर में एक लेन से शुरू हो सकता है यातायात

सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार परियोजना का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका था और करीब 95 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी सामने आई थी। ताजा तैयारियों के मुताबिक 30 नवंबर तक सुरक्षा, सौंदर्यीकरण और संबंधित कार्य पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है। वहीं एक अन्य रिपोर्ट में एक कैरिजवे पर 15 नवंबर और दूसरे पर 15 दिसंबर से यातायात शुरू करने की तैयारी बताई गई है। हालांकि अंतिम तारीख सुरक्षा परीक्षण और संबंधित विभागों की मंजूरी पर निर्भर करेगी।

कमांड सेंटर से होगी निगरानी

मलाक हरहर में आधुनिक तकनीक से लैस कमांड सेंटर भी तैयार किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक यहां से पुल और टोल क्षेत्र की निगरानी की जाएगी। हाई-क्वालिटी CCTV कैमरों और ऑटोमेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल किए जाने की योजना है। पुल के गंगा वाले हिस्से में थीम और फसाड लाइटिंग का ट्रायल भी किया जा चुका है। करीब 860 मीटर वाले हिस्से में लाइटिंग से पुल की खूबसूरती बढ़ाने की तैयारी है।

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