प्रयागराज स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक शर्मा के निलंबन के बाद विश्वविद्यालय का प्रशासनिक विवाद और गहरा गया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, उनके लैपटॉप की फोरेंसिक जांच में नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी गोपनीय सामग्री के चार दस्तावेज मिले। कार्रवाई से पहले तथ्य-जांच समिति बनाई गई और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
प्रयागराज। डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (RPNLU), प्रयागराज में पिछले कुछ समय से चल रहा प्रशासनिक विवाद अब सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक शर्मा के निलंबन तक पहुंच गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आदेश के आधार पर सामने आई जानकारी के अनुसार डॉ. शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई का मुख्य आधार विश्वविद्यालय की नियुक्ति प्रक्रियाओं से संबंधित कथित गोपनीय सामग्री का उनके लैपटॉप में पाया जाना बताया गया है।
31 अगस्त को बनी थी तथ्य-जांच समिति
मामले की शुरुआत डॉ. दीपक शर्मा के आचरण को लेकर मिली शिकायतों और उपलब्ध सामग्री से हुई। रिपोर्टों के मुताबिक विश्वविद्यालय ने 31 अगस्त 2026 को तथ्य-जांच समिति गठित की थी। समिति ने संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध सामग्री की जांच की। इसी प्रक्रिया में डॉ. शर्मा को आवंटित विश्वविद्यालय के लैपटॉप की सामग्री भी जांच के दायरे में आई।
फोरेंसिक जांच में विश्वविद्यालय की गोपनीय सामग्री से जुड़े चार दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है। इनमें 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों के चयन एवं नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज और एक असिस्टेंट रजिस्ट्रार की नियुक्ति से जुड़ा पत्राचार शामिल बताया गया है। हालांकि, दस्तावेज मिलने और उनसे जुड़े आरोपों की अंतिम जिम्मेदारी तय होना दो अलग बातें हैं। फिलहाल यह मामला विभागीय कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया में है।
कारण बताओ नोटिस के बाद निलंबन
जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉ. दीपक शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें 1 अक्टूबर तक जवाब देने का समय दिया गया था। उनके अतिरिक्त समय मांगने पर दो दिन की और मोहलत दी गई, लेकिन विस्तारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी लिखित जवाब नहीं मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलंबन का फैसला लिया
निलंबन आदेश में पद के दुरुपयोग, कदाचार, गोपनीय जानकारी के कथित खुलासे और आधिकारिक कार्य में हस्तक्षेप जैसे आरोपों का उल्लेख बताया गया है। इन आरोपों को अभी अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि विभागीय प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
निलंबन के दौरान कई प्रतिबंध
निलंबन अवधि में डॉ. दीपक शर्मा को विश्वविद्यालय के विभागों, छात्रावासों, अभिलेखों, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और डेटाबेस तक पहुंच से रोका गया है। उन्हें प्रतिदिन विश्वविद्यालय के रिसेप्शन काउंटर पर उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर भी रोक बताई गई है।रिपोर्ट के अनुसार निलंबन के दौरान उन्हें जांच में किसी तरह की बाधा डालने या गवाहों, छात्रों अथवा कर्मचारियों को प्रभावित करने से भी रोका गया है। नियमों के अनुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
12 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति पहले से थी विवाद में
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में RPNLU में हुई 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती महत्वपूर्ण है। अगस्त में Times of India ने रिपोर्ट किया था कि उत्तर प्रदेश के कानून विभाग की ओर से विश्वविद्यालय से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और स्पष्टीकरण मांगे गए थे।रिपोर्ट के अनुसार सवाल शॉर्टलिस्टिंग, चयन समिति के गठन, आरक्षण और उम्मीदवारों के मूल्यांकन जैसे बिंदुओं से जुड़े थे।
भर्ती के लिए 12 पदों का विज्ञापन मार्च में निकाला गया था और इंटरव्यू 22 से 30 जुलाई के बीच हुए थे। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. उषा टंडन ने उस समय कहा था कि भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हुई है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने यह भी कहा था कि सभी 12 चयनित फैकल्टी सदस्यों ने विश्वविद्यालय में ज्वाइन कर लिया था।
RPNLU की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 20 अगस्त 2026 को faculty recruitment से संबंधित एक प्रेस नोट प्रकाशित हुआ था, जिसमें विश्वविद्यालय ने भर्ती को लेकर “misleading and defamatory content” पर अपनी स्थिति रखी थी।
दीपक शर्मा ने लगाए अलग आरोपदूसरी ओर, डॉ. दीपक शर्मा ने अपनी कार्रवाई को लेकर अलग पक्ष रखा है। जागरण की रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया है कि उन्हें 316 पेज के नोटिस में 49 प्रश्नों का जवाब देना था और उन्होंने 15 दिन का समय मांगा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि 12 शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित कथित अनियमितताओं की जानकारी शासन की समिति को देने के कारण उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। यह डॉ. शर्मा का पक्ष है। इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
कुलपति-कुलसचिव विवाद भी बढ़ा
RPNLU में केवल भर्ती को लेकर ही विवाद नहीं है। कुलपति प्रो. उषा टंडन और कुलसचिव वरुण कुमार पांडेय के बीच प्रशासनिक मतभेद भी सामने आए हैं।Bar & Bench की रिपोर्ट के मुताबिक 28 सितंबर को कुलपति ने कुलसचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन, 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों को नियुक्ति पत्र जारी करने और अन्य प्रशासनिक मामलों से संबंधित आरोप शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार इस नोटिस के कुछ आरोप डॉ. शर्मा से जुड़े हाईकोर्ट मामले के प्रशासनिक अनुपालन से भी संबंधित थे। इससे स्पष्ट होता है कि विश्वविद्यालय में कई अलग-अलग प्रशासनिक घटनाक्रम एक साथ चल रहे हैं।
हाईकोर्ट का मामला निलंबन से अलग है
डॉ. शर्मा से संबंधित एक अन्य मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी चल रहा है। इसमें छात्रों की ओर से कथित जातिगत भेदभाव और परीक्षा मूल्यांकन से जुड़े आरोप लगाए गए थे। 16 सितंबर को एकल पीठ ने जांच और उत्तरपुस्तिकाओं के स्वतंत्र पुनर्मूल्यांकन से संबंधित निर्देश दिए थे तथा डॉ. शर्मा को जांच पूरी होने तक प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग रखने का आदेश दिया था। अदालत ने उस स्तर पर उनके खिलाफ कोई अंतिम निष्कर्ष दर्ज नहीं किया था।
इसके बाद 28 सितंबर को डिवीजन बेंच ने न्यायिक जांच के आदेश पर सवाल उठाए और विश्वविद्यालय के Equal Opportunity Cell की भूमिका का उल्लेख किया।













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