बिहार में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल तेज हुई है। सहकारी व्यवस्था के जरिए 8,723 महिलाओं को ₹32.26 करोड़ का लोन उपलब्ध कराया गया है। साथ ही गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाओं के विस्तार और डिजिटल सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
बिहार में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सहकारी व्यवस्था के जरिए वित्तीय सहायता देने पर जोर दिया जा रहा है। स्रोतों के जानकारी के मुताबिक, संयुक्त देयता समूह (JLG) और स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी 8,723 ग्रामीण महिलाओं को कुल ₹32.26 करोड़ का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद करना है। सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव के मुताबिक, सहकारी संस्थाओं के माध्यम से गांवों तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। लोन की मदद से ग्रामीण महिलाएं अपनी आय से जुड़ी गतिविधियां शुरू या आगे बढ़ा सकती हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है। सरकार का फोकस सहकारिता के जरिए ग्रामीण इलाकों में वित्तीय समावेशन को बढ़ाने पर है।
डेयरी कारोबार के जरिए गांव की महिलाओं को आर्थिक ताकत
सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने सोमवार को कहा कि राज्य में वित्तीय समावेशन को लेकर बड़ी पहल की जा रही है। बिहार राज्य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।इसका लाभ किसानों के साथ महिलाओं को भी मिल रहा है। डेयरी जैसे स्वरोजगार के माध्यम से महिलाएं अपनी आय का साधन विकसित कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
महिलाओं के लिए लोन बना स्वरोजगार का जरिया
JLG( ज्वाइंट लिबर्टी ग्रुप)और SHG( सेल्फ हेल्प ग्रुप) से समूहों के माध्यम से दिए गए ऋण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को अपनी आर्थिक गतिविधियां शुरू करने या उन्हें आगे बढ़ाने में मदद करना है। इससे महिलाओं की औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था तक पहुंच बढ़ाने और वित्तीय आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है। यह पहल बिहार में महिलाओं को केवल वित्तीय सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सहकारी ढांचे को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की व्यापक कोशिश का हिस्सा भी है।
गांवों तक कैसे पहुंच रही बैंकिंग सुविधा?
महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने के साथ-साथ बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। बिहार राज्य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के नेटवर्क के जरिए कई सहकारी समितियों को बैंकिंग सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। इनमें 186 दुग्ध सहकारी समितियां, 618 PACS, 19 PVCS और सात अन्य सहकारी समितियां शामिल हैं। इन केंद्रों पर माइक्रो-एटीएम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे ग्रामीण लोगों को बैंकिंग काम के लिए दूर जाने की जरूरत कम हो सकती है। विभागीय जानकारी के अनुसार, 16 अगस्त से एक महीने का विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत सहकारी समितियों और उनसे जुड़े सदस्यों के नए बैंक खाते खोलने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसका मकसद ग्रामीण आबादी को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना और वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और व्यापक बनाना है।
सहकारी बैंकों में डिजिटल सुविधाओं की तैयारी
बिहार के 23 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और बिहार राज्य सहकारी बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) अपग्रेडेशन को पूरा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बाद मोबाइल बैंकिंग और नेट बैंकिंग जैसी सुविधाएं शुरू होने की उम्मीद है। इससे सहकारी बैंकों की सेवाएं अधिक आधुनिक और डिजिटल बनाने में मदद मिल सकती है।कुल मिलाकर, 8,723 महिलाओं तक ₹32.26 करोड़ की ऋण सहायता पहुंचना ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसके साथ सहकारी समितियों, माइक्रो-एटीएम और डिजिटल बैंकिंग के विस्तार से बिहार के ग्रामीण इलाकों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। बिहार सहकारिता विभाग भी ग्रामीण वित्तीय समावेशन, PACS के कंप्यूटरीकरण और माइक्रो-एटीएम जैसी सुविधाओं के विस्तार को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करता है।












