मुंगेर: बिहार के मुंगेर जिले में गंगा के जलस्तर में एक बार फिर तेजी आने से मुंगेर के नदी किनारे बसे इलाकों में चिंता बढ़ गई है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक बुधवार दोपहर 3 बजे मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.63 मीटर दर्ज किया गया। यहां नदी का चेतावनी स्तर 38.33 मीटर, जबकि खतरे का निशान 39.33 मीटर निर्धारित है। इस तरह गंगा चेतावनी सीमा से करीब 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है और खतरे के निशान से लगभग 70 सेंटीमीटर नीचे है। सरकारी बाढ़ निगरानी आंकड़ों में नदी का रुख फिलहाल बढ़ता हुआ दर्ज किया गया है।
घटने के बाद दोबारा बढ़ा पानी
गंगा के जलस्तर में पहले आई कमी से तटवर्ती इलाकों के लोगों को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन पानी के फिर ऊपर जाने से संभावित बाढ़ और कटाव को लेकर आशंका दोबारा गहराने लगी है। नदी के आसपास रहने वाले परिवार लगातार जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर रख रहे हैं।मुंगेर में गंगा के जलस्तर को लेकर चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिले के कई निचले और दियारा इलाके नदी के प्रभाव वाले क्षेत्र में आते हैं। पानी बढ़ने की स्थिति में सबसे पहले इन इलाकों में आवागमन और दैनिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका रहती है।
कटाव ने बढ़ाई परेशानी
जलस्तर बढ़ने के साथ नदी की धारा का दबाव तटवर्ती इलाकों पर भी बढ़ रहा है। मुंगेर के कुछ गंगा किनारे के क्षेत्रों में कटाव की समस्या पहले से बनी हुई है। ऐसे में पानी का दोबारा बढ़ना स्थानीय लोगों के लिए सिर्फ बाढ़ का खतरा नहीं, बल्कि जमीन कटने की चिंता भी बढ़ा रहा है।सीताकुंड और लक्ष्मीपुर बिंद टोली जैसे इलाकों में पहले भी कटाव को लेकर ग्रामीणों की परेशानी सामने आ चुकी है। नदी किनारे की जमीन कमजोर होने से घरों के आसपास रहने वाले परिवारों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
निचले इलाकों में बढ़ सकता है दबाव
गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर के ऊपर पहुंचने का असर निचले क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। पानी बढ़ने की स्थिति में खेतों, संपर्क मार्गों और आवागमन से जुड़े रास्तों पर दबाव बढ़ सकता है। दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यहां कई स्थानों पर आवागमन पहले से ही नदी के जलस्तर पर निर्भर रहता है।बाढ़ की स्थिति में लोगों के सामने पीने के पानी, भोजन, पशुओं के चारे और सुरक्षित आवागमन जैसी समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं। यही वजह है कि नदी किनारे रहने वाले परिवार पानी के हर सेंटीमीटर बदलाव को गंभीरता से देख रहे हैं।
प्रशासन के सामने निगरानी की चुनौती
गंगा का जलस्तर बढ़ने के बीच तटवर्ती क्षेत्रों में लगातार निगरानी जरूरी हो गई है। प्रशासन के लिए चुनौती उन इलाकों की पहचान और निगरानी बढ़ाने की है, जहां जलस्तर बढ़ने के साथ कटाव या जलभराव की आशंका अधिक रहती है।बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव की तैयारियां पहले से रखना महत्वपूर्ण है। खासकर नदी के बेहद करीब बसे परिवारों को समय रहते स्थिति की जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
खतरे के निशान से अभी नीचे, लेकिन बढ़ रहा पानी
ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मुंगेर में गंगा अभी 39.33 मीटर के खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि जलस्तर बढ़ने का रुझान दर्ज किया गया है, इसलिए आने वाले घंटों में नदी का रुख अहम रहेगा।फिलहाल गंगा चेतावनी स्तर पार कर चुकी है और नदी किनारे रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जलस्तर में बढ़ोतरी कितनी देर जारी रहती है और नदी का पानी खतरे के निशान से कितनी दूरी बनाए रखता है। प्रशासन और बाढ़ निगरानी तंत्र के लिए भी आने वाले घंटों का जलस्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।













