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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026:लखनऊ बना देश का नंबर-1 शहर, MP का दबदबा; दिल्ली 21वें नंबर पर

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ ने देश के बड़े शहरों में पहला स्थान हासिल कर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। 198 अंकों के साथ लखनऊ ने इंदौर और जबलपुर को पीछे छोड़ा। इंदौर 197 और जबलपुर 195 अंकों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। दिल्ली 172 अंकों के साथ 21वें स्थान पर रही।

नई दिल्ली: स्वच्छ वायु के क्षेत्र में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के बड़े शहरों में पहला स्थान हासिल किया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB की ओर से घोषित Swachh Vayu Sarvekshan 2026 के नतीजों में लखनऊ को 198 अंक मिले। इसके साथ ही शहर ने पिछले साल की 15वीं रैंक से बड़ी छलांग लगाकर नंबर-1 स्थान हासिल किया। इस शहर में वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ वायु से जुड़े उपायों को मजबूत करने की दिशा में किए गए प्रयासों का नतीजा माना जा रहा है।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण रिपोर्ट में MP के 3 शहर टॉप 5 में लखनऊ के बाद मध्य प्रदेश के दो शहरों ने शानदार प्रदर्शन किया। इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। वहीं भोपाल और आगरा 192-192 अंकों के साथ संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे। गुजरात का सूरत शहर 191 अंकों के साथ पांचवें और रायपुर 189 अंकों के साथ छठे स्थान पर रहा। इस तरह टॉप-5 में मध्य प्रदेश के इंदौर और जबलपुर के साथ भोपाल की मौजूदगी रही, जबकि उत्तर प्रदेश के लखनऊ और आगरा ने भी अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई।

दिल्ली 21वें और मुंबई 28वें स्थान पर

राजधानी दिल्ली का प्रदर्शन शीर्ष शहरों की तुलना में कमजोर रहा। दिल्ली को 172 अंक मिले और वह 21वें स्थान पर रही।वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई 160.8 अंकों के साथ 28वें स्थान पर रही। इससे साफ है कि बड़े महानगरों के बीच भी स्वच्छ वायु से जुड़े प्रदर्शन में काफी अंतर देखने को मिला।

सड़क की धूल पर नियंत्रण से मिली मदद

लखनऊ के बेहतर प्रदर्शन के पीछे कई स्तरों पर किए गए प्रयासों को महत्वपूर्ण माना गया है। इनमें सड़क की धूल को नियंत्रित करना प्रमुख उपायों में शामिल है। शहर में सड़कों की सफाई को बेहतर बनाने के लिए मैकेनाइज्ड स्वीपिंग पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य सड़क पर जमा धूल को कम करना और उसके कारण होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है।

97 मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों का इस्तेमाल

रिपोर्टों के अनुसार, लखनऊ में 97 मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों की व्यवस्था की गई है। मशीनों के जरिए सड़कों की सफाई को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से सड़क की धूल एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में मैकेनाइज्ड सफाई व्यवस्था को मजबूत करना शहर के लिए अहम कदम माना जा रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहनों से कचरा संग्रह

लखनऊ में कचरा संग्रह के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। इससे कचरा उठाने की व्यवस्था को पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी ध्यान दिया गया, ताकि खुले में कचरा और उससे होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।

3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में राउरकेला आगे

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी को भी अलग से आंका गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार राउरकेला ने 198.5 अंकों के साथ इस कैटेगरी में पहला स्थान हासिल किया। फिरोजाबाद और गुंटूर 195-195 अंकों के साथ संयुक्त दूसरे स्थान पर रहे। वहीं कोरबा को 186.5 अंकों के साथ 10वां स्थान मिला।

स्वच्छ वायु के प्रयासों को मिली बड़ी पहचान

Swachh Vayu Sarvekshan 2026 में लखनऊ का नंबर-1 स्थान शहर के लिए बड़ी उपलब्धि है। वहीं इंदौर और जबलपुर का टॉप-3 में पहुंचना मध्य प्रदेश के मजबूत प्रदर्शन को दिखाता है। लखनऊ के 198 अंक, इंदौर के 197 और जबलपुर के 195 अंक इस बार की रैंकिंग में सबसे प्रमुख आंकड़े रहे। दूसरी ओर दिल्ली का 21वां और मुंबई का 28वां स्थान यह बताता है कि बड़े शहरों में स्वच्छ हवा के लिए किए जा रहे प्रयासों के परिणाम अलग-अलग रहे हैं।

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