भारतीय क्रिकेट के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने रविवार 6 सितंबर 2026 को अपने करियर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन की और से साउथ जोन के खिलाफ मैदान पर उतरते ही मोहम्मद शमी ने अपना 100वां फर्स्ट-क्लास मुकाबला पूरा किया। 36 वर्षीय शमी के लिए यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि लंबे क्रिकेट सफर मेहनत और लगातार खुद को साबित करने की कहानी है।
100वां फर्स्ट-क्लास मैच बना खास पड़ाव
मोहम्मद शमी ने अपने 100वें फर्स्ट-क्लास मैच से पहले 99 मुकाबलो में 382 विकेट हासिल किए थे। उनकी गेंदबाजी में गति के साथ-साथ सीम मूवमेंट और सटीक लाइन-लेंथ उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। दलीप ट्रॉफी का फाइनल चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जा रहा हैं और इस मुकाबले ने शमी के लिए व्यक्तिगत तौर पर इसे और खास बना दिया।
शमी ने इस मुकाम को अपने क्रिकेट करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनका फर्स्ट-क्लास सफर नवंबर 2010 में बंगाल के लिए शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट के साथ-साथ भारतीय टीम में भी अपनी जगह बनाई और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान कायम की।
टीम इंडिया में वापसी की उम्मीद अभी कायम
मोहम्मद शमी के 100वें फर्स्ट-क्लास मैच में सबसे बड़ी चर्चा उनकी भारतीय टीम में संभावित वापसी को लेकर भी है। घरेलू क्रिकेट में लगातार सक्रिय शमी के प्रदर्शन पर क्रिकेट प्रशंसकों और पूर्व क्रिकेटरों की नजर बनी हुई है। दलीप ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन इस बात का एक और संकेत है कि वह अभी भी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में खुद को साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने भी शमी के जमकर तारीफ की है। किशन का कहना है कि शमी के लिए उम्र सिर्फ एक संख्या है और उनमें भारतीय टीम में वापसी की उम्मीद और प्रेरणा अभी भी मौजूद है। उन्होंने यह भी बताया की समय की ऊर्जा और खेल के प्रति उनका रवैया इस सीजन में बेहद प्रभावशाली रहा है।
ईशान किशन ने शमी को बताया टीम के लिए बड़ा सहारा
ईशान किशन के मुताबिक टीम में शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज का होना युवा खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। मैदान पर उनका अनुभव कप्तान के लिए भी मददगार साबित होता है। शमी ने ईस्ट जोन को दिलीप ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंचने में भी अहम भूमिका निभाई। सेमीफाइनल में उन्होंने गेंद प्रभाव डाला और ईस्ट जोन ने सेंट्रल जोन को हराकर फाइनल में जगह बनाई।
ईशान किशन ने शमी की मेहनत और मैच के दौरान उनकी ऊर्जा को खास तौर पर रखा रेखांकित किया। उनका मानना है कि अगर कोई खिलाड़ी लगातार मेहनत करता रहे और अपने प्रदर्शन से खुद को साबित करें तो उम्र उसके रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।
पूर्व कोच भारत अरुण ने भी उठाई वापसी की आवाज
शमी को लेकर पूर्व भारतीय गेंदबाजी कोच भारत अरुण ने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने चयनकर्ताओं से शमी के लिए भारतीय टीम के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने की बात कही। भारत अरुण का मानना है कि अगर कोई अनुभवी खिलाड़ी प्रदर्शन करने की क्षमता है तो केवल उम्र के आधार पर उसे नजरअंदाज नहीं कर नहीं किया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब शमी अपना 100वां फर्स्ट-क्लास मैच खेल रहे हैं। ऐसे में उनके घरेलू क्रिकेट प्रदर्शन और फिटनेस पर चर्चा और तेज हो गई है।
CAB ने भी किया खास सम्मान
शमी के इस खास मुकाम से पहले क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) ने भी उन्हें सम्मानित किया। 100वें फर्स्ट-क्लास मैच की की उपलब्धि से पहले शमी को विशेष सम्मान दिया गया इस मौके पर ईशान किशन और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी मौजूद रहे।
शमी के लिए यह सम्इमान सलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके घरेलू क्रिकेट करियर की शुरुआत बंगाल से हुई थी। लंबे समय तक बंगाल क्रिकेट का प्रतिनिधित्व करने के बाद उन्होंने भारतीय क्रिकेट में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
शमी के करियर का अगला लक्ष्य क्या
100वां फर्स्ट क्लास मैच पूरा करने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है। कि क्या मोहम्मद शमी एक बार फिर भारतीय टीम की जर्सी में नजर आएंगे इसका फैसला पूरी तरह चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन पर निर्भर करेगा। लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन निश्चित तौर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
शमी के लिए यह उपलब्धि उनके करियर का नया अध्याय है वां फर्स्ट-क्लास मैच और 382 विकेट का रिकॉर्ड उनके लंबे और प्रभावशाली घरेलू करियर को दर्शाता है। अब उनकी नज़रें सिर्फ इस मुकाम पर नहीं, बल्कि आगे भी लगातार प्रदर्शन करके भारतीय टीम में वापसी की संभावना मजबूत करने पर होंगी।










