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बारिश में धंसा गंगा एक्सप्रेसवे, उद्घाटन के तीन महीने बाद उठे सवाल

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उन्नाव: उत्तर प्रदेश में 29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। हालांकि, अभी इसे बने हुए 3 महीने ही हो रहे है और अभी से ही बारिश होने के कारण इसके धसने की खबर आ रही है। गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में बने बड़े प्रोजेक्ट और लंबे एक्सप्रेसवे में से एक है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ-प्रयागराज मार्ग पर किलोमीटर 421 के पास सड़क के किनारे करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा बन गया। घटना के बाद मौके पर अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे और मरम्मत का काम शुरू किया गया।

तीन महीने पहले हुई थी, गंगा एक्सप्रेसवे की उद्घाटन

गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। यह उत्तरप्रदेश में सबसे लंबा 6 लेन एक्सप्रेसवे है। यह एक्सप्रेसवे मेरठ और प्रयागराज को जोड़ता है, और ये मेरठ से प्रयागराज आने में जो समय पहले 10-12 घंटे लगते थे उसे कम करके 6घंटे में पूरा करता है। करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे 12 जिलों को जोड़ता है, और उद्घाटन के कुछ ही समय बाद बारिश से नुकसान की खबर सामने आने से अब इसकी मजबूती पर चर्चा शुरू हो रही है।

पहले भी बारिश में सामने आई थी दिक्कत

गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ी बारिश की वजह से नुकसान की यह पहली खबर नहीं है। बल्कि उत्तर प्रदेश की पहली बारिश जुलाई में उन्नाव में एक्सप्रेसवे को सोनिक टोल प्लाजा से जोड़ने वाली करीब सात मीटर लंबी संपर्क सड़क भी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी। सड़क के किनारे की मिट्टी बहने के बाद उसका एक हिस्सा धंस गया था। इसके अलावा उन्नाव की सीमा में एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन के कई हिस्सों में भी बारिश के बाद नुकसान की खबर सामने आई थी। और अब 10मीटर गहरा गड्ढा और भी ज्यादा लोगो का ध्यान गंगा एक्सप्रेसवे की तरफ है और सरकार की आलोचना कर रहे हैं।

मरम्मत शुरू, लेकिन जांच का इंतजार

गंगा एक्सप्रेसवे के धसने के बाद प्रभावित हिस्से की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों ने नुकसान वाले स्थान का निरीक्षण किया है। अब यह देखना होगा कि जांच में क्या कारण सामने आता है और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट से लोगों को बेहतर और सुरक्षित सफर की उम्मीद है। ऐसे में उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद बारिश से हुए नुकसान ने परियोजना की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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