प्रयागराज: प्रयागराज में हो रहे लगातार बारिश के बाद कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन को राहत के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जिसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने नगर आयुक्त और जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि मोरी गेट और दारागंज के रास्ते जमा पानी को बाहर निकालने की व्यवस्था की जाए। अधिकारियों ने बताया कि इस काम से प्रभावित इलाकों को 24 से 48 घंटे में जलभराव से राहत मिल सकती है।जिसके बाद शहर के कई इलाके में पंपिंग सेट लगाए गए।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुई कारवाही
प्रयागराज में लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में इतना पानी भर गया है, जिसके वजह से बाढ़ आने से पहले ही शहर में बाढ़ की स्थिति बन है। इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, क्योंकि न्यायाधीशों को भी शहर में हुए जलभराव के वजह से कोर्ट पहुंचने में दिक्कत हो रही है, और कोर्ट की कारवाही में देरी हो रही है। जिसके बाद प्रशासन को जल्द राहत कार्य करने के निर्देश दिए। इसके बाद नगर निगम और जिला प्रशासन ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में पंपिंग सेट लगाकर पानी निकालने का काम शुरू किया है।
24 घंटों से चल रहा काम
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम की टीमें दिन-रात जलभराव वाले क्षेत्रों में लगी हुई हैं। CMP डिग्री कॉलेज, जॉर्ज टाउन, दारागंज, अल्लापुर, सोहबतियाबाग, टैगोर टाउन और अन्य निचले इलाकों में पंपों की मदद से पानी निकाला जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जहां भी जरूरत होगी, वहां अतिरिक्त पंप लगाए जाएंगे।
लोगो ने उठाए ड्रेनेज सिस्टम पे सवाल
हर साल ही हो रहे है प्रयागराज में जलभराव की समस्या के बाद शहर की नालियों और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगो का कहना है की नगर निगम क्यों नहीं काम कर रही थी, इतने दिनों से जब हर साल ही प्रयागराज में जलभराव हो जाता हैl जिसके वजह से लोगों को आने जाने में बहुत परेशानी हो रही है। हाईकोर्ट ने प्रशासन से यह भी जानकारी मांगी है कि बरसात से पहले नालों की सफाई और पानी निकासी के लिए क्या तैयारी की गई थी।
लोगों को मिली आंशिक राहत
कई इलाकों में पानी कम होने लगा है, लेकिन कुछ जगहों पर अब भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ और घरों तक पानी पहुंचने की शिकायतें भी सामने आईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान ऐसी स्थिति बनती है और स्थायी समाधान की जरूरत है।











