प्रयागराज। आम लोगों की शिकायतों के समाधान में लापरवाही को लेकर प्रयागराज के जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है। संगम सभागार में हुई बैठक में IGRS पोर्टल पर लंबित शिकायतों और उनके निस्तारण के बाद मिले फीडबैक की समीक्षा की गई। इस दौरान डीएम ने साफ कहा कि शिकायत को सिर्फ पोर्टल पर निस्तारित दिखाना काफी नहीं है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि शिकायतकर्ता की समस्या वास्तव में दूर हुई या नहीं।
शिकायतकर्ता से बात करने के निर्देश
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों के निस्तारण से पहले संबंधित शिकायतकर्ताओं से बातचीत की जाए। निस्तारण के बाद उनका फीडबैक भी लिया जाए, ताकि यह पता चल सके कि कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं या नहीं।बैठक में सामने आए फीडबैक के आधार पर अधिकारियों को शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

बिजली विभाग और अन्य विभागों पर नाराजगी
समीक्षा के दौरान विद्युत विभाग, PWD और जल निगम ग्रामीण से जुड़ी शिकायतों में असंतुष्ट फीडबैक की स्थिति पर चर्चा हुई। खास तौर पर जहां शिकायतकर्ताओं से बातचीत नहीं की गई थी या उन्हें कार्रवाई से संतुष्टि नहीं मिली, वहां डीएम ने संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में जरूरी कार्रवाई की जाए और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी लिया जाए।
IGRS को लेकर लापरवाही नहीं होगी स्वीकार
डीएम ने स्पष्ट किया कि IGRS शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।प्रशासन का फोकस अब सिर्फ शिकायतों की संख्या कम करने पर नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर है कि लोगों को उनकी शिकायत का वास्तविक समाधान मिले और उन्हें बार-बार अपनी समस्या लेकर अधिकारियों के पास न जाना पड़े।
क्या है IGRS?
IGRS यानी Integrated Grievance Redressal System उत्तर प्रदेश सरकार की जनशिकायत व्यवस्था है। इसके माध्यम से नागरिक अपनी समस्याओं और शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचा सकते हैं। शिकायत पर हुई कार्रवाई और उसके बाद मिलने वाले फीडबैक के आधार पर प्रशासन संबंधित अधिकारियों के काम की समीक्षा करता है।











