अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 सितंबर 2026 को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिका-ईरान के छह महीने पुराने सैन्य टकराव को “स्मॉल पोटैटोज़” यानी बेहद मामूली बात का दर्जा दिया। यह बयान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की उस टिप्पणी के एक दिन बाद आया जिसमें उन्होंने इस संघर्ष को “युद्ध” मानने से इनकार किया था। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका जल्द ही ईरान के अत्यधिक सुरक्षित परमाणु स्थल Pickaxe Mountain पर हमला कर सकता है।
वाशिंगटन।अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी 2026 से चल रहा सैन्य टकराव अब अपने सातवें महीने में प्रवेश कर चुका है, लेकिन इसका कोई स्पष्ट अंत नजर नहीं आ रहा। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस संघर्ष को गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग इसे युद्ध नहीं मानते, और वे खुद भी इसे केवल एक “सैन्य संघर्ष” मानते हैं क्योंकि अमेरिका की कार्रवाइयां रुक-रुक कर हो रही हैं। ट्रंप के शब्दों में, “यह हमारे लिए स्मॉल पोटैटोज़ है, कोई बड़ी बात नहीं।”
वेंस के बयान ने मचाई हलचल
ट्रंप का यह बयान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की गुरुवार को दी गई टिप्पणी के एक दिन बाद आया। वेंस ने व्हाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग में इस संघर्ष को “युद्ध” कहने से साफ इनकार किया था और यह भी नहीं बताया था कि नवंबर के मिडटर्म चुनावों से पहले यह टकराव खत्म होगा या नहीं।ऐसे चुनाव जिनमें रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपनी संकरी बहुमत बचाने की जद्दोजहद में जुटी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावों को देखते हुए प्रशासन जानबूझकर इस युद्ध को कमतर दिखाने की कोशिश कर रहा है, खासकर तब जब ईंधन की बढ़ती कीमतों से जनता में नाराजगी बढ़ रही है।
जनहानि और वित्तीय नुकसान के बावजूद बयान पर सफाई
इस संघर्ष में अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है और लगभग 800 सैनिक घायल हुए हैं, जबकि अमेरिकी करदाताओं को इस पर 37.5 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करना पड़ा है। जब एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि इतने बड़े नुकसान के बावजूद इसे “स्मॉल पोटैटोज़” कैसे कहा जा सकता है, तो ट्रंप ने वियतनाम युद्ध का उदाहरण देते हुए कहे कि उसमें अमेरिका ने एक लाख से ज्यादा सैनिक खोए थे, जबकि अन्य संघर्षों में भी हजारों जानें गईं। इस लिहाज से मौजूदा नुकसान अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने जनवरी में हुए वेनेजुएला ऑपरेशन का भी प्रमाण दिया, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा गया था और उसमें कोई अमेरिकी सैनिक नहीं मरा था।
Pickaxe Mountain पर मंडराता खतरा
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अमेरिका “बहुत जल्द” ईरान के Pickaxe Mountain नामक स्थल पर हमला कर सकता है। ईरान में इसे कुह-ए-कोलंग गाज़ ला कहा जाता है, जो इस्फ़हान प्रांत में तेहरान से करीब 220 किलोमीटर दूर, बमबारी झेल चुके नतांज परमाणु संवर्धन परिसर से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार यह ठिकाना सैकड़ों मीटर मोटी ग्रेनाइट चट्टान के भीतर गहराई में बनाया गया है ताकि इसे बंकर-भेदी बमों से बचाया जा सके। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की अंतरिक्ष तकनीक और स्पेस फोर्स की मदद से उन्हें इस स्थल पर हो रही हर गतिविधि की पूरी जानकारी है।
क्षेत्रीय तनाव जारी
हाल के दिनों में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देश कुवैत पर भी हमला किया। इसे अमेरिकी हमलों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। अब संघर्ष बढ़कर ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां कोई पक्ष पीछे हटता नहीं दिख रहा। इस बीच, तेहरान रणनीतिक समुद्री रास्ते में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित कर रहा है।
चुनावी और संवैधानिक सवाल
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना मामूली बहुमत बनाए रखने की चुनौती है। इसलिए माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन इस संघर्ष को ज्यादा बड़ा दिखाने से बच रहा है।वहीं, अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने राष्ट्रपति से सैन्य कार्रवाई के लिए औपचारिक मंजूरी लेने को कहा था। इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन बिना मंजूरी के अभियान जारी रखे हुए है। इससे अमेरिका में इस कार्रवाई की कानूनी और संवैधानिक वैधता को लेकर बहस तेज हो गई है।












