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ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, SIR रद्द करने पर अड़ी DMK; बैलेट पेपर से चुनाव कराने की उठाई मांग

एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में हुई बैठक में चार प्रस्ताव पास; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन देगी पार्टी, छात्र संगठनों के प्रदर्शन को भी समर्थन

चेन्नई: तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। पार्टी ने मतदाता सूची की जांच के लिए चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को रद्द करने और EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी उठाई है।

शनिवार, 17 अक्टूबर को DMK अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में सांसदों की बैठक हुई। इस बैठक में चुनाव आयोग के कामकाज, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

बैठक के बाद पार्टी ने अपनी मांगों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने रखने का फैसला किया। DMK ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन को भी समर्थन दिया है।

हालांकि, ये DMK की राजनीतिक मांगें हैं। इनसे अपने आप चुनाव आयोग के फैसले नहीं बदलते और न ही मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है।

DMK की बैठक में क्या फैसले हुए?

DMK की बैठक में चार प्रमुख प्रस्ताव पास किए गए। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्र संगठनों को समर्थन, कांग्रेस और TVK की आलोचना तथा राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने का फैसला शामिल है।

पार्टी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही उसने SIR को पूरी तरह बंद करने और बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग दोहराई।

SIR को लेकर DMK को क्या आपत्ति है?

SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। हिंदी में इसे मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कहा जाता है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की जांच की जाती है और उसमें जरूरी बदलाव किए जाते हैं।

DMK का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से नहीं हटना चाहिए। पार्टी ने SIR को रद्द करने की मांग की है।

विपक्षी दलों ने भी इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटने को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से हटा दिया जाता है, तो वह अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, DMK ने दावा किया कि तमिलनाडु में SIR के दौरान 97 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

मतदाता अपनी जानकारी और पंजीकरण की स्थिति भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर देख सकते हैं

EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

DMK ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी की है।

पार्टी का मानना है कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर विचार किया जाना चाहिए। उसने VVPAT पर्चियों की गिनती से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं।

VVPAT वह व्यवस्था है, जिसमें मतदान के बाद मतदाता कुछ समय के लिए अपनी वोट पर्ची देख सकता है। इससे उसे यह जानकारी मिलती है कि उसका वोट किस उम्मीदवार के नाम दर्ज हुआ है।

हालांकि, EVM पर सवाल उठाने का मतलब यह नहीं है कि किसी चुनाव में गड़बड़ी साबित हो गई है। किसी भी आरोप की पुष्टि के लिए ठोस सबूत और जांच जरूरी है।

फिलहाल, बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग DMK के राजनीतिक प्रस्ताव का हिस्सा है। इसे लागू करने के लिए संबंधित नियमों और कानूनी प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।

CJP के प्रदर्शन को DMK का समर्थन

DMK ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्र संगठनों और अन्य समूहों को भी समर्थन दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में लहरा दो तिरंगा अभियान के तहत प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कई FIR दर्ज कीं और 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान नियमों के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए।

हालांकि, FIR दर्ज होने या हिरासत में लिए जाने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति दोषी साबित हो गया है। इसका फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है।

DMK ने इन प्रदर्शनों के समर्थन के जरिए चुनाव आयोग की जवाबदेही और विरोध करने के अधिकार से जुड़े मुद्दों को उठाया है।

कांग्रेस और TVK पर भी उठाए सवाल

DMK ने बैठक में कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के रुख की भी आलोचना की।

रिपोर्ट के अनुसार, DMK ने SIR के मुद्दे पर इन दलों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। पार्टी का मानना है कि इस मामले में राजनीतिक दलों का रुख एक जैसा नहीं रहा है।

ये DMK के आरोप और राजनीतिक विचार हैं। कांग्रेस और TVK का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। इसलिए इन आरोपों को अंतिम सच मानने के बजाय संबंधित दलों के जवाब के साथ देखा जाना चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

DMK अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को सामने रखना चाहती है।

पार्टी की मुख्य मांगें हैं:

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए।
  • SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द किया जाए।
  • EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर विचार किया जाए।
  • मतदाता सूची में किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे।

हालांकि, इन मांगों पर आगे क्या कार्रवाई होगी, यह संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

इस पूरे विवाद में सबसे जरूरी बात यह है कि हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना चाहिए और उसे बिना किसी परेशानी के मतदान करने का मौका मिलना चाहिए।

चुनाव आयोग पर उठने वाले सवालों का जवाब पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए। साथ ही, चुनाव में गड़बड़ी के किसी भी आरोप की जांच सबूतों के आधार पर होनी चाहिए।

DMK के इस फैसले से SIR, EVM और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। अब राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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