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Allahabad University की Science Faculty: जहां से निकलीं विज्ञान की कई बड़ी हस्तियां

Allahabad University : प्रयागराज का इलाहाबाद यूनिवर्सिटी सिर्फ राजनीति, कानून और साहित्य के बड़े नामों के लिए ही नहीं जाना जाता। बल्कि विज्ञान के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय की लंबी और खास पहचान रही है। यहाँ से अनेको बड़ी हस्तियां विज्ञान के क्षेत्र में निकली है और बड़े-बड़े आविष्कार किए हैं।इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की स्थापना 23 सितंबर 1887 को हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में शामिल है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को ‘ऑक्सफोर्ड ऑफ़ द ईस्ट’ यानी ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड‘ कहा जाता है। इसकी स्थापना से पहले 1873 में Muir Central College की नींव रखी गई थी, जो आगे चलकर विश्वविद्यालय के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। Allahabad university की official website https://allduniv.ac.in/ है यहाँ आप सभी जानकारी पढ़ सकते है

Allahabad university की Science Faculty

Allahabad university के विज्ञान संकाय (Science Faculty) की शुरुआत 1922 में हुई थी। इस विश्वविद्यालय को अंग्रेजों के शासन में बनवाया गया था जिसमें पहले विज्ञान संकाय नहीं थी पर 1921 में पुनर्गठन होने के बाद, म्योर सेंट्रल कॉलेज (Muir Central College) को विश्वविद्यालय के विज्ञान खंड के रूप में इस्तेमाल किया गया और वहीं पढ़ाई करवाई गई। इसी दौरान भौतिकी, गणित, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान जैसे विषयों को एक साथ लाकर विज्ञान संकाय का निर्माण किया गया। हालांकि, गणित की पढ़ाई इससे भी काफी पहले शुरू हो चुकी थी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी मे उसके बाद कई छात्र पढ़े और आज बड़ी हस्तियां है अपने क्षेत्र में है।

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़कर निकले विज्ञान की बड़ी हस्तियां

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की आधिकारिक एलुमनाई(Alumini) पूर्व छात्र सूची में विज्ञान और गणित के क्षेत्र से जुड़े कई बड़े नाम शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने उनके योगदान के साथ उनकी विशेषज्ञता भी दर्ज की है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

क्रमांकनामक्षेत्र
1मेघनाद साहाभौतिक विज्ञानी
2दाउलत सिंह कोठारीभौतिक विज्ञानी
3कुंदन सिंह सिंघवीभौतिक विज्ञानी
4हरिशचंद्रगणितज्ञ
5गोविंद स्वरूपभौतिक विज्ञानी
6एस. एन. घोषभौतिक विज्ञानी
7गोरख प्रसादगणितज्ञ
8एन. आर. धररसायन विज्ञानी
9दीपक धरभौतिक विज्ञानी

इन नामों में मेघनाद साहा, दाउलत सिंह कोठारी, गोविंद स्वरूप और दीपक धर खास तौर पर उल्लेखनीय हैं। इन वैज्ञानिकों ने भौतिकी और उससे जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम किया और देश में विज्ञान और शोध की पहचान को मजबूत किया।

मेघनाद साहा: Physics Department को दी नई पहचान

Allahabad university की विज्ञान की विरासत में मेघनाद साहा का नाम खास तौर पर लिया जाता है। विश्वविद्यालय में 1923 में साहा को भौतिकी विभाग का पहला प्रोफेसर और विभाग का अध्यक्ष बनाया गया। उस समय विभाग में उच्च स्तर पर अध्ययन के लिए सुविधाएं सीमित थीं। साहा के प्रयासों से विभाग में अध्ययन को बढ़ावा मिला और आगे चलकर यहां परमाणु स्पेक्ट्रम, आयनमंडल, एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोपी और ध्वनि से जुड़े वैज्ञानिक क्षेत्रों में काम हुआ। साहा की पहचान केवल विश्वविद्यालयमें नहीं बल्कि ‘साहा आयनीकरण समीकरण’ के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। यह समीकरण तारों के तापमान और उनके स्पेक्ट्रम में दिखाई देने वाले तत्वों को समझने में वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। उनके वैज्ञानिक काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। नोबेल पुरस्कार के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, साहा को 1930 से 1955 के बीच भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए कुल सात बार नामांकित किया गया था। हालांकि, उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला था।

दाउलत सिंह कोठारी: साहा के छात्र बने देश के प्रमुख वैज्ञानिक

दाउलत सिंह कोठारी का Allahabad university से गहरा संबंध रहा। उन्होंने अपनी बीएससी और भौतिकी में एमएससी की पढ़ाई विश्वविद्यालय से की। वह मेघनाद साहा के छात्र थे और उनसे काफी प्रभावित थे। कोठारी बाद में उच्च शिक्षा के लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए और वहां से पीएचडी की। भारत लौटने के बाद कोठारी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 1948 में उन्हें रक्षा मंत्री का पहला वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त किया गया। उन्होंने वैज्ञानिकों की मदद से रक्षा विज्ञान संगठन की स्थापना की, जिसमें रक्षा से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में शोध शुरू किया गया। यही संगठन आगे चलकर भारत की रक्षा अनुसंधान व्यवस्था और डीआरडीओ (DRDO) की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहा।

गोविंद स्वरूप: भारत में Radio Astronomy को नई पहचान दी

गोविंद स्वरूप का नाम भारत में रेडियो खगोल विज्ञान को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों में लिया जाता है। उन्होंने 1950 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और 1963 में होमी भाभा के आमंत्रण पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) से जुड़े। यहीं उन्होंने भारत में रेडियो खगोल विज्ञान के लिए एक अलग समूह की शुरुआत की, जो आगे चलकर देश में इस क्षेत्र के विकास का आधार बना। गोविंद स्वरूप के नेतृत्व में ऊटी रेडियो टेलीस्कोप और बाद में जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT) जैसी बड़ी वेधशालाओं का निर्माण हुआ। ऊटी रेडियो टेलीस्कोप ने 1970 के दशक की शुरुआत में भारत को रेडियो खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं GMRT के निर्माण ने भारत की इस क्षेत्र में क्षमता को और मजबूत किया। इसी योगदान के कारण गोविंद स्वरूप को भारत में रेडियो खगोल विज्ञान का जनक भी कहा जाता है।

दीपक धर: Statical Physics के लिए दुनिया भर में पहचान

दीपक धर Allahabad university के छात्र थे, जिन्होंने सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी कानपुर से भौतिकी में एमएससी और अमेरिका के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पीएचडी की। इसके बाद वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), मुंबई के सैद्धांतिक भौतिकी विभाग से जुड़े और 2016 तक वहां काम किया। धर का मुख्य काम सांख्यिकीय भौतिकी के क्षेत्र में रहा है। उन्होंने जटिल वैज्ञानिक प्रणालियों, स्व-संगठित क्रांतिकता और अव्यवस्थित पदार्थों में होने वाली प्रक्रियाओं जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण काम किया। उनके योगदान के लिए उन्हें 2022 में बोल्ट्जमान पदक मिला और वे यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक बने। इसके बाद भारत सरकार ने उन्हें 2023 में विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया।

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी: गणित और रसायन विज्ञान में भी बड़ी पहचान

Allahabad university से जुड़े वैज्ञानिकों ने भौतिकी के साथ-साथ गणित और रसायन विज्ञान में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। विश्वविद्यालय की पूर्व छात्र सूची में हरीशचंद्र और गोरख प्रसाद को गणितज्ञ, कुंदन सिंह सिंघवी और एस. एन. घोष को भौतिक विज्ञानी और एन. आर. धर को रसायन विज्ञानी के रूप में दर्ज किया गया है। हरीशचंद्र ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सैद्धांतिक भौतिकी की पढ़ाई की और बाद में गणित के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। उन्होंने प्रतिनिधित्व सिद्धांत और ली समूहों पर महत्वपूर्ण काम किया, जिसका असर आधुनिक गणित और सैद्धांतिक भौतिकी दोनों पर पड़ा।

एक पुरानी विरासत, जो आज भी जारी है

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की विज्ञान संकाय (Science Faculty) की कहानी सिर्फ पुराने वैज्ञानिकों के नाम गिनाने तक सीमित नहीं है। 1920 के दशक में जिस विज्ञान खंड और भौतिकी विभाग ने आकार लेना शुरू किया था, वहां से आगे चलकर कई वैज्ञानिकों ने देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाई। मेघनाद साहा की वैज्ञानिक विरासत से लेकर गोविंद स्वरूप की Radio Astronomy और दीपक धर की Statistical Physics तक, इन नामों ने प्रयागराज के इस विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक पहचान को मजबूत किया है। यही वजह है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केवल राजनीति और साहित्य की विरासत के लिए नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक परंपरा में उसके योगदान के लिए भी याद किया जाता है।

आज भी विश्वविद्यालय के भौतिकी और गणित विभागों में कई आधुनिक क्षेत्रों में अध्ययन और अनुसंधान जारी है।

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