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तमिलनाडु में RTI को लेकर बड़ा फैसला वापस, कानून-व्यवस्था विभाग को मिली थी छूट

तमिलनाडु सरकार ने सूचना के अधिकार यानी RTI को लेकर जारी अपने एक हम आदेश को वापस ले लिया है। सरकार ने 21 सितंबर 2026 को Public (Law and order), Department को RTI Act, 2005 के दायरे से बाहर रखने का आदेश जारी किया था। इस फैसले के बाद राजनीतिक दलों और पारदर्शिता से जुड़े संगठनों की ओर से सवाल उठाए गए इसके बाद 27 सितंबर को सरकार से सबंधित आदेश रद्द कर दिया।

क्या था सरकार का मूल फैसला

21 सितंबर के आदेश में Public (Law and order) Department को RTI Act की धारा 24(4) के तहत एक “Intelligence and security organisation” के रूप में अधिसूचित किया गया था। इसका मतलब यह था कि विभाग से जुड़ी कई तरह की सूचनाओं को RTI के जरिए हासिल करने पर रोक लग सकती है।

किन मामलों की जानकारी पर पड़ सकता था असर

यह विभाग कानून-व्यवस्था से जुड़े कई संवेदनशील मामलों को देखता है। इसमें सामुदायिक और जातीय विवाद, राजनीतिक प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, हिरासत में मौत, कथित पुलिस यातना और पुलिस फायरिंग से जुड़ी जांच जैसी चीजें शामिल हैं। इसलिए आदेश को लेकर पारदर्शिता और सार्वजनिक जानकारी तक पहुंच को लेकर सवाल उठे।

विरोध के बाद सरकार का यू-टर्न

आदेश सामने आने के बाद सरकार के सहयोगी दलों और विपक्षी नेताओं समेत कई लोगों ने इसकी आलोचना की और इसे वापस लेने की मांग की इसके बाद Human Resources Management Department ने नया आदेश जारी करते हुए 21 सितंबर के GO Ms. No. 57 को रद्द कर दिया।

अब क्या स्थिति है

सरकार द्वारा आदेश वापस लेने के बाद Public (Law and order) Department को RTI से मिली प्रस्तावित छूट समाप्त हो गई है, यानी 21 सितंबर के आदेश जरिए लागू किए गए विशेष exemption अब प्रभावी नहीं हैं। हालांकि RTI Act में पहले से मौजूद अन्य कनूनी अपवाद अपनी जगह लागू रहते हैं।

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