नई दिल्ली: Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2016 (FCRA) जो कि विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए लाया गया, जिसमें दोनों पक्षों की बहस न होने के कारण अब जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेज दिया गया है। 12 अगस्त को लोकसभा में इस संबंध में प्रस्ताव मंजूर हुआ। विपक्ष ने बिल को वापस लेने की मांग की और इसके प्रावधानों पर सवाल उठाए।
FCRA क्या है और इसमें बदलाव क्यों किया जा रहा है?
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act विदेश से मिलने वाले चंदे और फंड पर नजर रखने वाला कानून है। इसका मकसद यह तय करना है कि भारत में आने वाले विदेशी फंड का इस्तेमाल सही तरीके से हो और उसका गलत इस्तेमाल न किया जाए।
लेकिन अब सरकार FCRA में कुछ बदलाव करना चाहती है, ताकि विदेशी फंड से जुड़ी निगरानी और नियमों को और साफ किया जा सके ताकि उस पैसे का गलत इस्तेमाल न हो सके। इसी के तहत नया संशोधन विधेयक लाया गया है, जिसमें FCRA से जुड़े कुछ नियमों और उल्लंघन पर कार्रवाई के प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव है।
विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?
FCRA बिल को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि इसके कुछ प्रावधानों से NGO और दूसरे संगठनों के कामकाज पर ज्यादा असर पड़ सकता है और इससे माइनॉरिटी । विपक्षी नेताओं ने इसे अल्पसंख्यक संस्थानों पर हमला बताते हुए बिल का विरोध किया है। लोकसभा में इस मुद्दे पर हंगामा भी देखने को मिला।
अब आगे क्या होगा?
FCRA बिल में JPC अब अलग-अलग प्रावधानों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट देगी। इसके बाद सरकार बिल में बदलाव कर सकती है और संसद में इसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। JPC को भेजे जाने का मतलब यह नहीं है कि बिल पास हो गया है या खारिज हो गया है। अभी इस पर आगे की संसदीय प्रक्रिया बाकी है। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। JPC समिति को शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट देने का लक्ष्य दिया गया है।













