उत्तराखंड के अल्मोड़ा से एक युवा इनोवेटर का बनाया इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल इन दिनों चर्चा में है। रवि टम्टा ने ड्रोन तकनीक पर आधारित HAPIDA SKYNeX का टेस्ट किया है। सिंगल-सीटर इस प्रोटोटाइप को पहाड़ी इलाकों में तेज और वैकल्पिक परिवहन की संभावनाओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
अल्मोड़ा से सामने आया अनोखा इनोवेशन
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सड़क और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सफर कई बार लंबा हो जाता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए अल्मोड़ा के काफलीखान गांव से जुड़े रवि टम्टा ने हवा में उड़ने वाले इलेक्ट्रिक वाहन का प्रोटोटाइप तैयार किया है। इस वाहन को HAPIDA SKYNeX नाम दिया गया है। यह पारंपरिक कार की तरह सड़क पर चलने के बजाय ड्रोन जैसी तकनीक के सहारे हवा में उठने के लिए डिजाइन किया गया है।
6 अगस्त को किया गया टेस्ट
रवि टम्टा के इस प्रोटोटाइप का परीक्षण 6 अगस्त 2026 को किया गया। टेस्ट के दौरान वाहन ने जमीन से ऊपर उठकर उड़ान भरी। परीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की निगरानी का भी ध्यान रखा गया। यह उड़ान अभी शुरुआती परीक्षण का हिस्सा है। इसका मतलब यह नहीं है कि वाहन को आम लोगों के लिए व्यावसायिक रूप से उपलब्ध करा दिया गया है।
एक व्यक्ति के बैठने के लिए तैयार किया गया है
HAPIDA SKYNeX को फिलहाल सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल के रूप में विकसित किया गया है। इसके डिजाइन में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि वाहन को जमीन से ऊपर उठाया जा सके। इस प्रोजेक्ट का मौजूदा मॉडल एक प्रोटोटाइप है। आगे इसके डिजाइन, उड़ान क्षमता और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर और काम किया जाना बाकी है।
पहाड़ी सफर को तेज बनाने की कोशिश
रवि टम्टा के इस प्रयोग के पीछे पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन को आसान बनाने का विचार भी जुड़ा है। उत्तराखंड में कई स्थान ऐसे हैं जहां पहाड़ों की वजह से सड़क मार्ग से कम दूरी तय करने में भी काफी समय लग सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, रवि जिस क्षेत्र से जुड़े हैं वहां लगभग 40 किलोमीटर की सड़क यात्रा में करीब डेढ़ घंटे तक का समय लग सकता है। उनका उद्देश्य भविष्य में ऐसी तकनीक विकसित करना है जिससे इसी तरह की दूरी को काफी कम समय में तय किया जा सके।
करीब एक साल से चल रहा था काम
रिपोर्टों के मुताबिक रवि टम्टा ने इस प्रोजेक्ट पर लगभग एक साल तक काम किया। शुरुआती स्तर पर एक उड़ने वाले इलेक्ट्रिक वाहन का मॉडल तैयार करने के बाद उन्होंने इसका टेस्ट किया। पहली सफल उड़ान उनके प्रोजेक्ट के लिए एक अहम शुरुआती कदम मानी जा रही है। हालांकि, किसी प्रोटोटाइप की टेस्ट फ्लाइट और आम यात्रियों के लिए सुरक्षित व्यावसायिक उड़ान के बीच कई तकनीकी चरण होते हैं।
मुख्यमंत्री ने भी सराहा
इस इनोवेशन के सामने आने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी रवि टम्टा के प्रयास की सराहना की। उन्होंने युवाओं की तकनीकी प्रतिभा और नए प्रयोगों को प्रोत्साहित करने की बात कही। सरकार और प्रशासन की ओर से मिली सराहना ने इस प्रोजेक्ट को और चर्चा में ला दिया है।
अभी कई चुनौतियां बाकी
फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप सफलतापूर्वक उड़ना निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसे आम परिवहन का साधन बनने में अभी काफी समय लग सकता है। ऐसे वाहनों के लिए उड़ान सुरक्षा, बैटरी क्षमता, मौसम का प्रभाव, नियंत्रण प्रणाली, आपात स्थिति में सुरक्षा और हवाई क्षेत्र से जुड़े नियम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए आगे के परीक्षण इस प्रोजेक्ट की वास्तविक क्षमता तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
क्या भविष्य में पहाड़ों में उड़ेंगी ऐसी गाड़ियां?
रवि टम्टा का प्रयोग इस बात की ओर इशारा करता है कि ड्रोन और इलेक्ट्रिक तकनीक को भविष्य के व्यक्तिगत परिवहन के साथ जोड़ा जा सकता है। फिलहाल HAPIDA SKYNeX एक शुरुआती प्रोटोटाइप है, लेकिन इसकी सफल टेस्ट फ्लाइट ने उत्तराखंड के एक स्थानीय इनोवेटर के प्रयोग को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। अगर आने वाले चरणों में तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को दूर किया जाता है, तो ऐसे वाहन भविष्य में दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के लिए परिवहन का एक नया विकल्प बन सकते हैं।












