लखनऊ में होने वाली इस अहम बैठक में बसपा प्रमुख मायावती संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर की रणनीति तय करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपने पर चर्चा करेंगी।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आगामी 3 सितंबर को देशभर के पार्टी पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने और आगामी चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने के मकसद से आयोजित की जा रही है।यह बैठक बसपा सुप्रीमो मायावती की अध्यक्षता में होगी। सूत्रों के मुताबिक इसका आयोजन लखनऊ स्थित बसपा के प्रदेश मुख्यालय में होने की संभावना है, जहां पहले भी पार्टी की अहम बैठकें होती रही हैं। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता, राज्य स्तरीय पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष, कोऑर्डिनेटर और अन्य प्रमुख कार्यकर्ता शामिल होंगे, जो देशभर से पहुंचेंगे। यह एक संगठनात्मक समीक्षा बैठक है, जिसमें पार्टी की मौजूदा स्थिति, संगठन विस्तार और चुनावी तैयारियों पर चर्चा की जाएगी।इस दौरान जिला और मंडल स्तर तक संगठन की समीक्षा की जाएगी, पदाधिकारियों से जमीनी रिपोर्ट ली जाएगी, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए जाएंगे, और सामाजिक न्याय व सर्वसमाज को साथ लाने की रणनीति पर चर्चा होगी। इसके अलावा पिछली बैठकों में दिए गए निर्देशों की प्रगति की भी समीक्षा किए जाने की उम्मीद है
राष्ट्रीय दर्जा बचाने की जंग, अकेले मैदान में उतरेगी बसपा
बैठक में मायावती अगले साल 15 जनवरी को मनाए जाने वाले ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के दौरान पार्टी फंड में योगदान को पिछली बार के मुकाबले बढ़ाने का टारगेट भी पदाधिकारियों को देंगी।इसका मतलब है कि इस समय बसपा का लोकसभा, विधानसभा या विधान परिषद किसी भी सदन में एक भी सदस्य नहीं है।पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका था, और अगर विधानसभा चुनाव में भी प्रदर्शन नहीं सुधरा तो बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी छिन सकता है। मायावती पहले ही कह चुकी हैं कि गठबंधन में चुनाव लड़ने से पार्टी को सीटों और वोट प्रतिशत, दोनों में नुकसान उठाना पड़ता है।इसी वजह से उन्होंने ऐलान कर दिया है कि आगे बसपा हर राज्य में अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।
गठबंधन को लेकर भी रुख साफ
हाल ही के राजनीतिक घटनाक्रम में मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अपने दम पर चुनाव लड़ने का रुख स्पष्ट किया है। पार्टी ने इन राज्यों में किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करने की बात कही है। ऐसे में 3 सितंबर की बैठक को बसपा की आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक के दौरान पार्टी नेतृत्व पदाधिकारियों को चुनावी तैयारियों से जुड़े दिशा-निर्देश दे सकता है।
3 सितंबर को इन मुद्दों पर हो सकती है बातें
3 सितंबर की बैठक में मायावती पार्टी नेताओं के साथ बैठकर “2027 का चुनाव कैसे लड़ना है और BSP के संगठन को कैसे मजबूत करना है” इस पर मंथन करेंगी। अभी यह कहना सही नहीं होगा कि उस दिन कोई बड़ा फैसला निश्चित रूप से लिया जाएगा क्योंकि उसकी पुष्टि बैठक के बाद ही होगी।














