पटना: बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर पिछले कुछ दिनों से छात्रों और अभिभावकों के बीच यह सवाल था कि क्या शिक्षा लोन 4 लाख रुपये से घटकर 2 लाख रुपये कर दी गई है। लेकिन अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आखिरकार ये साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए 4 लाख रुपये तक की सुविधा आगे भी जारी रहेगी। हालांकि, उन्होंने बताया कि लोन देने की व्यवस्था में कुछ बदलाव किया गया है।
लोन के लिए 4 लाख मिलेंगे
बिहार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 24 अगस्त को छात्रों और अभिभावकों को साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिए 4 लाख रुपये तक की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि युवाओं की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और पैसों की कमी को पढ़ाई के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया जाएगा। और सरकार ने इस दावे को गलत बताया है।
आखिर क्यों हुआ कन्फ्यूजन?
दरअसल, सीएम को सफाई इसलिए देनी पड़ी क्योंकि पिछले दिनों योजना के तहत मिलने वाले लोन की व्यवस्था में बदलाव की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद से ही लोगों में ये बाते होने लगी कि क्या सरकार ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाला अधिकतम लोन 4 लाख से घटाकर सिर्फ 2 लाख रुपये कर दिया है। पर अब सीएम ने ये कन्फ्यूजन दूर कर दिया है।
लोन देने की प्रक्रिया में बदलाव
सीएम ने बताया कि बदलाव लोन के पैसों में नहीं बल्कि उसे देने के तरीके में हुआ है। पहले बिहार स्टेट एजुकेशन फाइनेंस कॉरपोरेशन के जरिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 4 लाख रुपये तक का पूरा शिक्षा लोन उपलब्ध कराया जाता था। पर अब जरूरत के हिसाब से दिया जाएगा। नई व्यवस्था में बिहार स्टेट एजुकेशन फाइनेंस कॉरपोरेशन के जरिए पहले 2 लाख रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। पर अगर छात्र को 2 लाख रुपये से ज्यादा और अधिकतम 4 लाख रुपये तक की जरूरत है, तो बाकी राशि शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इसी कारण वजह से लोगों में भ्रम पैदा हो गया था कि क्या सरकार छात्रों को 4 लाख देगी?
यानी 4 लाख रुपये की अधिकतम सीमा खत्म नहीं हुई है, बल्कि 2 लाख रुपये से ऊपर की राशि के लिए बैंकिंग सिस्टम को भी इसमें जोड़ा गया है। यही बदलाव सामने आने के बाद छात्रों के बीच यह भ्रम पैदा हुआ कि अब योजना में सिर्फ 2 लाख रुपये ही मिलेंगे। बिहार सरकार की सफाई के बाद यह बात स्पष्ट हो गई है कि 2 लाख रुपये राज्य वित्त निगम के माध्यम से मिलने वाली सीमा है, जबकि योजना के तहत कुल सहायता 4 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
सरकार ने क्यों बदली लोन देने की व्यवस्था?
बिहार सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद छात्रों के लिए वित्तीय मदद के विकल्प बढ़ाना है। सरकार ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को बैंकों के साथ-साथ प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी पोर्टल और प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना से जोड़ने की दिशा में कदम उठाया है। छात्र प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के तहत पात्रता के अनुसार 10 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन का विकल्प भी देख सकते हैं। इससे ज्यादा संख्या में छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए संस्थागत वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
किन छात्रों को मिलेगा स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से लोन?
बिहार सरकार के योजना का लाभ मुख्य रूप से बिहार के निवासी उन छात्रों को दिया जाता है जिन्होंने 12वीं या उसके समक्ष परीक्षा पास की है और उच्च शिक्षा के लिए आगे पढ़ना चाहते हैं। पॉलीटेक्निक जैसे कुछ पाठ्यक्रमों के लिए 10वीं पास छात्रों को भी पात्रता दी गई है। वही छात्र का चयन किसी मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थान में होना जरूरी है। योजना के तहत सामान्य, प्रोफेशनल और तकनीकी उच्च शिक्षा के लिए लोन दिया जाता है। हालांकि, हर कोर्स और संस्थान योजना के नियमों के अनुसार पात्र होना चाहिए।
कितनी ब्याज दर पर मिलता है लोन?
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की तहत सामान्य पात्र छात्रों के लिए शिक्षा लोन पर 4 प्रतिशत साधारण ब्याज लिया जाता है। वहीं महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर आवेदकों के लिए 1 प्रतिशत साधारण ब्याज का प्रावधान है।योजना में पढ़ाई पूरी होने के तुरंत बाद भुगतान शुरू नहीं करना पड़ता। सरकार की जानकारी के मुताबिक, मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज का भुगतान स्थगित रहता है। यह अवधि कोर्स पूरा होने के एक साल बाद या नौकरी मिलने के छह महीने बाद तक, जो पहले हो, के हिसाब से तय होती है।













