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रूस-यूक्रेन के श्रद्धालुओं ने गयाजी में साथ किया पिंडदान, 6 अक्टूबर तक पहुंचे 37.50 लाख लोग

पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से उमड़ी आस्था की भीड़, विदेशी श्रद्धालुओं के लिए AI अनुवाद से लेकर टेंट सिटी और सुरक्षा व्यवस्था तक खास इंतजाम

बिहार। बिहार के गयाजी में चल रहे पितृपक्ष मेले में इस बार आस्था की अंतरराष्ट्रीय तस्वीर देखने को मिल रही है। 6 अक्टूबर तक 37 लाख 50 हजार 200 श्रद्धालु, तीर्थयात्री और पिंडदानी गयाजी पहुंच चुके हैं। इनमें देश के अलग-अलग हिस्सों के श्रद्धालुओं के साथ विदेशों से आए लोग भी शामिल हैं। इसी दौरान रूस और यूक्रेन से आए श्रद्धालुओं ने भी गयाजी में अपने पूर्वजों की शांति के लिए एक साथ पिंडदान और तर्पण किया।

गयाजी में आयोजित पितृपक्ष मेला 2026 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चल रहा है। बिहार स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (BSTDC) के आधिकारिक पोर्टल पर भी मेले की यही अवधि दर्ज है।

रूस और यूक्रेन के श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान

पितृपक्ष मेले के दौरान 2 अक्टूबर को फल्गु नदी के देवघाट पर विदेशी श्रद्धालुओं के एक समूह ने पिंडदान और तर्पण किया। रिपोर्ट के मुताबिक 22 विदेशी श्रद्धालुओं के इस समूह में 6 रूस, 11 जर्मनी, 2 यूक्रेन, 1 इटली और 1 लातविया का नागरिक शामिल था। रूस और यूक्रेन के नागरिकों का एक ही धार्मिक आयोजन में शामिल होना इस आयोजन की सबसे खास तस्वीरों में से एक रहा।

8 अक्टूबर को दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देशों से करीब 30 से 40 श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने की संभावना भी जताई गई है।

37 लाख 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे गयाजी

पितृपक्ष मेले के दौरान इस बार श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। 6 अक्टूबर तक 37,50,200 श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने का आंकड़ा सामने आया है। इससे पहले 5 अक्टूबर तक फुटफॉल 32.94 लाख पार कर चुका था। प्रशासन ने यह संख्या प्रमुख पिंडवेदी और धार्मिक स्थलों पर लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक फुट-काउंटिंग सिस्टम के आधार पर बताई थी। इससे संकेत मिलता है कि गयाजी का पितृपक्ष मेला धार्मिक पर्यटन के लिहाज से लगातार बड़ा होता जा रहा है।

स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रशासन का फोकस

लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात और सहायता सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया है। मेले के दौरान मेडिकल सेवाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है और श्रद्धालुओं की सहायता के लिए नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय किए गए हैं।गया जिला प्रशासन की तैयारियों में अस्थायी CCTV, ड्रोन कैमरा, पुलिस कैंप, स्वास्थ्य शिविर और अन्य व्यवस्थाएं भी शामिल हैं। जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं में मेले के लिए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संबंधी व्यवस्थाओं के लिए CCTV तथा ड्रोन जैसी तकनीक के इस्तेमाल से संबंधित तैयारियां दर्ज हैं

टेंट सिटी में हजारों श्रद्धालुओं को ठहरने की सुविधा

दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था भी की गई है। मेले से पहले प्रशासन ने गांधी मैदान क्षेत्र में टेंट सिटी की व्यवस्था की थी। शुरुआती तैयारियों में 2,500 बेड वाली टेंट सिटी की योजना सामने आई थी। रिपोर्टों के मुताबिक इस सुविधा का इस्तेमाल हजारों श्रद्धालुओं ने किया है। इससे बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले तीर्थयात्रियों को ठहरने में मदद मिली है।

बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए रिस्ट बैंड

मेले में भारी भीड़ के बीच बच्चों और बुजुर्गों के परिवार से अलग होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने रिस्ट बैंड की व्यवस्था की है। इससे किसी व्यक्ति के भीड़ में बिछड़ने की स्थिति में उसकी पहचान और परिवार तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

विदेशी श्रद्धालुओं के लिए AI भाषा अनुवाद

इस बार गयाजी मेले में तकनीक का इस्तेमाल भी विशेष आकर्षण बना है। अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले श्रद्धालुओं की सहायता के लिए AI आधारित भाषा अनुवाद सुविधा उपलब्ध कराई गई है।6 अक्टूबर तक 84,756 तीर्थयात्री इस सुविधा का इस्तेमाल कर चुके थे। विदेशी श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधा संवाद और आवश्यक जानकारी हासिल करने में मददगार साबित हो रही है।

पितरों की स्मृति में पौधरोपण, 482 पौधे लगाए गए

पितृपक्ष मेले को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ पहल भी चलाई जा रही है। इसके तहत पितृवाटिका में अब तक 482 पौधे लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पहल के जरिए पारंपरिक पिंडदान और तर्पण के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश जोड़ने की कोशिश की गई है।

2022 से लगातार बढ़ रहा गयाजी का पर्यटन फुटफॉल

गयाजी में धार्मिक पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता को पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। उपलब्ध पर्यटन विभाग के आंकड़ों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार 2022 में करीब 9.40 लाख, 2023 में 29.89 लाख, 2024 में 30.59 लाख और 2025 में करीब 34.79 लाख पर्यटक गयाजी पहुंचे थे। हालांकि, इन वार्षिक पर्यटन आंकड़ों और मौजूदा पितृपक्ष मेले के फुटफॉल को सीधे समान श्रेणी मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों की गणना का संदर्भ अलग हो सकता है। इसलिए इस खबर में 2026 पितृपक्ष के लिए प्रशासन/पर्यटन विभाग द्वारा बताए गए 37,50,200 फुटफॉल को अलग से प्रस्तुत किया गया है।

कब तक चलेगा पितृपक्ष मेला?

बिहार पर्यटन के आधिकारिक BSTDC पोर्टल के अनुसार पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु गयाजी पहुंचकर पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं।

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