देश में महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 4.45 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि खाद्य महंगाई 5.5 प्रतिशत के आसपास रही। रोजमर्रा की जरूरतों में चावल, कुछ दालें और खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं प्याज और कुछ अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी का असर दिखाई दे रहा है।
रसोई के खर्च पर बढ़ा दबाव
महंगाई का सबसे सीधा असर आम परिवार के रसोई बजट पर पड़ता है। चावल, दाल, तेल, दूध और सब्जियां रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजें हैं और इनकी कीमतों में थोड़ा-सा बदलाव भी महीने के कुल खर्च पर असर डालता है।केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग के Price Monitoring System के मुताबिक देशभर के 555 बाजार केंद्रों से रोजाना जरूरी वस्तुओं के दाम जुटाए जाते हैं। 22 अगस्त 2026 के अखिल भारतीय औसत खुदरा आंकड़ों में चावल की कीमत 45.63 रुपये प्रति किलो दर्ज हुई। एक महीने पहले यह 44.74 रुपये थी। यानी करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। एक साल पहले के मुकाबले चावल की कीमत करीब 6.2 प्रतिशत ज्यादा है।
तेल की कीमत बनी चिंता
रसोई में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेलों की कीमत भी लोगों के बजट को प्रभावित कर रही है। 22 अगस्त को पैक्ड मूंगफली तेल का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव करीब 208.90 रुपये प्रति किलो के आसपास था, जबकि सरसों तेल और अन्य खाद्य तेल भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं।खाद्य तेलों की कीमतों पर घरेलू उत्पादन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों का भी असर पड़ता है। हाल के महीनों में वैश्विक वनस्पति तेल कीमतों में मजबूती ने भारत के लिए भी चिंता बढ़ाई है।
दालों में भी जेब पर असर
दालों के दाम में भी कई परिवारों को राहत नहीं मिली है। 22 अगस्त के सरकारी आंकड़ों में अरहर दाल का औसत खुदरा भाव करीब 123 रुपये प्रति किलो, उड़द दाल करीब 122 रुपये और मूंग दाल करीब 112 रुपये प्रति किलो रहा। मसूर दाल का औसत भाव करीब 90 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया।हालांकि सभी दालों की कीमतें एक जैसी दिशा में नहीं बढ़ रही हैं। इसलिए महंगाई की तस्वीर को पूरी तरह समझने के लिए अलग-अलग वस्तुओं के आंकड़े देखना जरूरी है।
प्याज ने बढ़ाई चिंता, टमाटर से कुछ राहत
सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। जुलाई में प्याज की महंगाई दर करीब 22.6 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि टमाटर की कीमतों में पिछले साल की तुलना में नरमी देखने को मिली। टमाटर की महंगाई दर जुलाई में नकारात्मक रही और आलू की कीमतों में भी सालाना आधार पर गिरावट दर्ज हुई।यानी सब्जियों के मामले में तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। कुछ चीजें महंगी हुई हैं तो कुछ में राहत भी मिली है।
चीनी और दूध पर भी नजर
सरकार के Price Monitoring System में चीनी और दूध समेत 22 जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर लगातार नजर रखी जाती है। 22 अगस्त को देश में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब 60 रुपये प्रति किलो और दूध करीब 61 रुपये प्रति लीटर के आसपास दर्ज किया गया।इन कीमतों में स्थानीय बाजार, ब्रांड, गुणवत्ता और शहर के हिसाब से अंतर हो सकता है। इसलिए किसी एक शहर की दुकान की कीमत को पूरे देश की कीमत मानना सही नहीं होगा।
सिर्फ खाने का सामान ही नहीं, दूसरी चीजों पर भी असर
महंगाई का दबाव केवल किचन तक सीमित नहीं है। हाल की रिपोर्टों में पैकेज्ड और रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ने की बात सामने आई है। खाद्य तेल, डेयरी उत्पाद, अनाज और पैकेजिंग लागत बढ़ने से कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ रहा है, जिसका कुछ असर ग्राहकों तक पहुंच सकता है।कुछ रिपोर्टों में साबुन, टूथपेस्ट, बिस्किट, हेयर ऑयल जैसे रोजमर्रा के FMCG सामान और वाहनों से जुड़ी लागत में भी बढ़ोतरी की बात सामने आई है। हालांकि इन वस्तुओं के मामले में कीमत हर कंपनी और उत्पाद के हिसाब से अलग हो सकती है।
हर सामान महंगा नहीं हुआ
महंगाई की खबर में यह समझना भी जरूरी है कि बाजार में हर चीज की कीमत नहीं बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों में गेहूं, आटा और कई दालों की कीमतों में अलग-अलग अवधि में कमी या मामूली बदलाव भी देखने को मिल रहा है। इसलिए मौजूदा स्थिति को “कुछ जरूरी वस्तुओं पर बढ़ा कीमतों का दबाव” कहना ज्यादा सही होगा।फिलहाल आम परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता रसोई का बढ़ता खर्च है। खाद्य तेल, चावल, दाल और कुछ सब्जियों की कीमतों में तेजी के बीच आने वाले महीनों में मौसम, फसल, सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतें तय करेंगी कि महंगाई का दबाव कितना बढ़ता या कम होता है।








