नई दिल्ली: टाटा समूह के लिए बड़ी खबर सामने आई है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होने के बाद पद पर बने रहने की इच्छा नहीं जताई है। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा और इसके बाद वह टाटा संस के चेयरमैन पद से हट जाएंगे।
चंद्रशेखरन ने नहीं मांगा नया कार्यकाल
एन. चंद्रशेखरन ने साफ किया है कि वह फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए नियुक्ति नहीं मांगेंगे। इससे टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
चंद्रशेखरन साल 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के CEO और Managing Director के पद पर भी रह चुके हैं। वह 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे और धीरे-धीरे समूह के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे।
टाटा ट्रस्ट्स के साथ मतभेद भी बनी वजह
चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर 2026 की शुरुआत से ही टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद की खबरें सामने आती रही थीं। फरवरी में उनके तीसरे कार्यकाल पर चर्चा के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की ओर से कुछ मुद्दे उठाए गए थे, जिसके बाद पुनर्नियुक्ति पर फैसला टाल दिया गया था।
टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। नेतृत्व, समूह की रणनीति, कुछ कंपनियों के प्रदर्शन और पूंजी निवेश जैसे मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव की रिपोर्ट सामने आई थी।
20 फरवरी 2027 तक संभालेंगे जिम्मेदारी
चंद्रशेखरन तत्काल पद नहीं छोड़ेंगे। वह अपने मौजूदा कार्यकाल के अंतिम दिन तक चेयरमैन की जिम्मेदारी निभाएंगे और इस दौरान समूह की महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं की निगरानी करेंगे। उनके बाद टाटा संस को नया चेयरमैन मिलेगा।
टाटा समूह के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, एविएशन और अन्य नए क्षेत्रों में विस्तार किया है। उनके जाने के बाद उत्तराधिकारी का चुनाव टाटा समूह के लिए बेहद अहम होगा, खासकर ऐसे समय में जब समूह की कई बड़ी कंपनियां रणनीतिक और कारोबारी चुनौतियों का सामना कर रही हैं।








