---Advertisement---

बसपा में मची हलचल! मायावती ने आकाश आनंद को किया बेदखल

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी में उत्तराधिकार को लेकर चल रही सत्ता संघर्ष ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को अपने भतीजे आकाश आनंद की प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर उन्हें संगठन से पूरी तरह अलग कर दिया। दिलचस्प यह है कि यह कदम आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति छोड़ने की घोषणा के महज एक दिन बाद उठाया गया। जिससे साफ है कि पार्टी नेतृत्व का असंतोष केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार के व्यापक आचरण को लेकर था।

बसपा में आकाश आनंद को लंबे समय से मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनके और पार्टी हाईकमान के बीच दूरियां बढ़ती नजर आईं। इसका पहला बड़ा संकेत तब मिला जब 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद की जिम्मेदारियों से हटा दिया गया था। इसके बाद निगाहें उनके ससुर व पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की भूमिका पर टिक गईं, जिन पर पार्टी नेतृत्व परिवारवाद और निजी महत्वाकांक्षा को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है।

अशोक सिद्धार्थ का संन्यास, फिर भी नहीं मिली राहत

बुधवार को अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। यह कदम मायावती की उस सार्वजनिक अपील के एक दिन बाद आया जिसमें उन्होंने अशोक सिद्धार्थ से पार्टी, आंदोलन और खुद उनके दामाद के भविष्य को देखते हुए राजनीति छोड़ने का आग्रह किया था। हालांकि मायावती ने इस फैसले को देरी से उठाया गया सही कदम बताते हुए इसका स्वागत किया, लेकिन यह घटनाक्रम आकाश आनंद को पार्टी में बनाए रखने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।

आकाश आनंद का सियासी सफर -उभार से लेकर बेदखली तक

आकाश आनंद की सियासी एंट्री को बसपा में एक नई पीढ़ी की शुरुआत के तौर पर देखा गया था। उन्हें पार्टी की रैलियों में सक्रिय भूमिका दी गई, सोशल मीडिया पर पार्टी का चेहरा बनाया गया और कई मौकों पर मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर पेश भी किया गया। लेकिन बीते कुछ समय में यह तस्वीर लगातार बदलती गई। पहले जिम्मेदारियों में कटौती, फिर पद से हटाना, और अब पार्टी से पूर्ण बेदखली। यह हलचल साफ दिखाती है कि बसपा में नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर आंतरिक असामंजस्य अब भी बना हुआ है, जो आने वाले चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर सकता है।

मायावती का सार्वजनिक बयान क्यों उठाया इतना सख्त कदम

गुरुवार सुबह अपने आधिकारिक X हैंडल से जारी विस्तृत बयान में मायावती ने इस पूरे प्रकरण पर खुलकर बात की। उनका मुख्य तर्क यह था कि यदि परिवार से जुड़ा यह फैसला पहले लिया गया होता, तो पार्टी और आंदोलन को बार-बार मुश्किल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। खासकर उस समय जब बसपा उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की तैयारियों में जुटी है। उन्होंने पार्टी की स्थापना के मूल सिद्धांतों —त्याग, संघर्ष और निजी स्वार्थ से दूरी का हवाला देते हुए कहा कि हर कार्यकर्ता को इन्हीं मूल्यों पर चलना चाहिए।बयान में मायावती ने यह भी संकेत दिया कि अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भले संन्यास के ऐलान के बाद थमी दिख रही हो, लेकिन उनके व्यवहार में इसकी झलक अब भी नजर आती है। इसके सबूत के तौर पर उन्होंने आकाश आनंद के आचरण का भी जिक्र किया। यह बताते हुए कि जहां पहले वे पार्टी प्रमुख की पोस्ट को सोशल मीडिया पर साझा कर अपनी निष्ठा जाहिर करते थे, वहीं हालिया घटनाक्रम से जुड़ी पोस्ट को साझा करने से वे बचते नजर आए।

‘पार्टी से ज्यादा परिवार को प्रधानता

मायावती के बयान का केंद्रीय बिंदु यही रहा कि आकाश आनंद अपने करियर और पार्टी हित से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता दे रहे थे, जिससे उनके नेतृत्व में स्पष्टता और प्रतिबद्धता की कमी झलकती थी। इसी आधार पर उन्हें अब औपचारिक रूप से पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया। यानी आकाश आनंद न सिर्फ किसी पद पर, बल्कि पार्टी की सामान्य सदस्यता में भी नहीं रहेंगे।

2027 की तैयारी पर फोकस

अपने बयान के समापन में मायावती ने कार्यकर्ताओं का ध्यान आंतरिक विवाद से हटाकर आगामी चुनावी लक्ष्य की ओर मोड़ा। उन्होंने विरोधियों की रणनीतियों का डटकर मुकाबला करने और उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मजबूत बहुमत वाली सरकार बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कार्यकर्ताओं से पूरी एकजुटता के साथ जुटे रहने की अपील की।

Follow Us On

---Advertisement---

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment