राम मंदिर: संसद के मानसून सत्र के दौरान अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी के विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया। संसद भवन परिसर में विपक्ष के सांसदों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर इस मुद्दे को उठाया। इस प्रदर्शन ने संसद परिसर में मौजूद सांसदों और मीडिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
साधु के वेश में दिखे पप्पू यादव, नाटक के जरिए विरोध
बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव एक बार फिर नजर आये अनोखे अंदाज में | नुक्कड़ नाटक में लिया साधु का वेश, जिसके लिए उन्होंने भगवा वस्त्र धारण किए, जमीन पर आसन लगाया और अपने सामने राम मंदिर की तस्वीर रखी। इसके साथ ही एक दान पात्र भी रखा गया। नाटक के दौरान कुछ लोग दान देने के लिए आगे बढ़े, लेकिन पप्पू यादव उनके हाथों से पैसे लेकर उन्हें दान पात्र में डालने के बजाय अपनी जेब में रखते हुए दिखाई दिए। इस प्रस्तुति के माध्यम से विपक्ष ने कथित गड़बड़ीओ पर सवाल उठाने की कोशिश की।
राहुल गांधी, खरगे और प्रियंका गांधी भी रहे मौजूद
इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी सहित विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता संसद परिसर में मौजूद रहे। नाटक के दौरान राहुल गांधी भी प्रदर्शन का हिस्सा बने और प्रतीकात्मक रूप से मंदिर में चढ़ावा चढ़ाते हुए नजर आए। विपक्षी नेताओं ने इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए सरकार से मामले की पारदर्शी जांच कराने और आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
समाजवादी पार्टी के नारे बने प्रदर्शन का केंद्र
विरोध प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के सांसद भी सक्रिय रूप से शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने “चंदा चोर, गद्दी छोड़” जैसे नारे लगाए जिससे सरकार पे दबाव बनाया और सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि वह लगातार संसद में इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक चर्चा की अनुमति नहीं दी गई। जिसके बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
ओम बिरला ने जताई आपत्ति
इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद परिसर में सांसदों द्वारा अलग-अलग वेशभूषा पहनकर प्रदर्शन करने और नुक्कड़ नाटक आयोजित करने पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक चर्चा का सर्वोच्च मंच है और इसकी गरिमा बनाए रखना प्रत्येक सांसद की जिम्मेदारी है। उन्होंने सदस्यों से संसदीय परंपराओं और मर्यादा का पालन करने की अपील की।













