Prayagraj Flood Report: गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के बीच कानपुर गंगा बैराज से करीब 2.95 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से प्रयागराज में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। संगम और नदी किनारे के निचले इलाकों में पानी का दबाव बढ़ने की आशंका है।
गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर ( Prayagraj Flood Report) में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। बुधवार रात आठ बजे फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 80.43 मीटर, छतनाग में 79.53 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 79.94 मीटर दर्ज किया गया था।प्रयागराज में बाढ़ का खतरे का निशान 84.734 मीटर है। फाफामऊ में दर्ज जलस्तर खतरे के निशान से करीब 4.30 मीटर नीचे था, लेकिन लगातार हो रही बढ़ोतरी और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण प्रशासन की चिंता बनी हुई है।
संगम और कछारी इलाकों पर बढ़ सकता है दबाव
कानपुर बैराज से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी प्रयागराज पहुंचने पर गंगा के जलस्तर को प्रभावित कर सकता है। गंगा-यमुना पहले से बढ़ रही हैं, ऐसे में संगम क्षेत्र, कछारी इलाकों और नदी किनारे बसे निचले क्षेत्रों में पानी का दबाव बढ़ने की आशंका है।इसी बीच प्रयागराज में टोंस और बेलन नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय जल आयोग की चेतावनी के बाद तटीय इलाकों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है।
संगम क्षेत्र में भी पहुंचा बाढ़ का पानी
लगातार बढ़ते जलस्तर का असर संगम क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार संगम क्षेत्र में जलभराव बढ़ा है और बाढ़ का पानी बड़े हनुमान मंदिर की दहलीज तक पहुंचने की स्थिति सामने आई है। संगमतट पर रहने वाले तीर्थपुरोहितों और अस्थायी दुकानदारों ने भी सामान हटाना शुरू कर दिया है।वहीं, 21 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार प्रयागराज में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं और निचले इलाकों में पानी का असर बढ़ रहा है। संगम क्षेत्र में जलभराव के साथ राहत-बचाव गतिविधियां भी जारी हैं।
प्रशासन की बढ़ी सक्रियता
लगातार बढ़ते जलस्तर का असर संगम क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार संगम क्षेत्र में जलभराव बढ़ा है और बाढ़ का पानी बड़े हनुमान मंदिर की दहलीज तक पहुंचने की स्थिति सामने आई है। संगमतट पर रहने वाले तीर्थपुरोहितों और अस्थायी दुकानदारों ने भी सामान हटाना शुरू कर दिया है।वहीं, 21 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार प्रयागराज में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं और निचले इलाकों में पानी का असर बढ़ रहा है। संगम क्षेत्र में जलभराव के साथ राहत-बचाव गतिविधियां भी जारी हैं।












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